भोरफटते ही अपनी मां की सांसे बटोरने में 100 किलोमीटर की यात्रा तय करते हैं ,बच्चे पीड़िता की ऑक्सीजन आपूर्ति गुरुद्वारे के सेवादारों के भरोसे चल रही है...

Jun 2, 2021 - 04:54
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भोरफटते ही अपनी मां की सांसे बटोरने में 100 किलोमीटर की यात्रा तय करते हैं ,बच्चे  पीड़िता की ऑक्सीजन आपूर्ति गुरुद्वारे के सेवादारों के भरोसे चल रही है...

लक्ष्मणगढ़ अलवर (गिर्राज प्रसाद सोलंकी)

लक्ष्मणगढ़ कस्बे के वार्ड नंबर 12 नेताजी की गली में स्थित एक पीड़िता जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है। वही पीड़िता को सांसे बटोरने के लिए।भोर फटते ही बच्चों को लांकडाउन में 100 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती तय


जानकारी के अनुसार कस्बा निवासी सुभाष हरियाणा इनकी धर्मपत्नी कमलेश जो कि लगभग 7 माह से अपनी बीमारू हालत में चल रही थी पीड़ित महिला कमलेश को खांसी टाइफाइड जैसी बीमारी की चपेट में थी जिस के इलाज के लिए लक्ष्मणगढ़ अलवर जयपुर दिखलाया गया। फेफड़े व श्वास लेने में परेशानी महसूस होने लगी पीड़िता नवंबर माह से अपने दवा व इलाज के भरोसे चल रहे थी। राहत न मिलने पर 11 मार्च को जयपुर के सवाई मानसिंह हॉस्पिटल में भर्ती कराकर इलाज कराया वही डॉक्टरी सलाह के अनुसार बताया गया कि 3 माह ऑक्सीजन बराबर चलेगी दवाई वह खाना पीना जारी रहेगा और मरीज में सुधार भी होगा, अगर मरीज को बराबर ऑक्सीजन नहीं मिली तो जीना संभव नहीं, इस तरह की वार्तालाप कहते हुए डॉक्टर के द्वारा बच्चों के पैरों तले जमीन खिसक गई। कोरोना संक्रमण फैल चुका है हॉस्पिटलों में लंबे समय तक रख नहीं सकते डॉक्टरों का कहना था कहीं इस बीमारी के साथ संक्रमण की चपेट में ना आ जाए अंथा भारी नुकसान उठाना पड़ जाएगा और डॉक्टरी सलाह मानते हुए 18 मार्च को हॉस्पिटल से छुट्टी लेकर अब बच्चे अपने घर में अपनी मां की सेवा में जुटे हुए हैं । दिन रात 24 घंटे एक टक  लगाए हुए अपनी मां के पास बैठे रहते हैं।

           मां के लिए संजीवनी के रूप में ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए आवागमन करते हुए बच्चे

देश में फैल रही महामारी कोरोना संक्रमण इनके लिए एक चुनौती बन चुका है। इनके पिता जी दिल्ली के अंदर बैंगल स्टोर की दुकान करते हैं बच्चे अपने साउंड सर्विस का कार्य देखते हैं। लॉकडाउन व पत्नी की बीमारी हालत को देखकर के चलते पिता भी अब चार माह से बच्चों की सेवा में ही लगे हैं। ऐसे में लाकडॉन की स्थिति में परिवार पर आर्थिक स्थिति का संकट बन पड़ा है। अब अपनी मां के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था में जुटे परिवार जन पहले तो गैस वेल्डिंग वालों से ऑक्सीजन उपलब्ध कर लेते थे। और अब ऑक्सीजन की कालाबाजारी में भी इन्हें कीमत से अधिक मूल्य चुका कर ऑक्सीजन सिलेंडर एकत्रित किए लॉकडाउन में आवागमन की परमिशन नहीं फिर भी बच्चे यही इंतजार करते कि कब सुबह होगी और कब मैं मां के लिए स्वास बटोरने के लिए निकलूंगा जैसे ही भोर फटती बच्चे अपनी मां के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था में निकल पड़ते बाइक पर अलवर जाते और अलवर में गुरुद्वारा सिंह सभा स्कीम नंबर 2 अलवर के द्वारा ऑक्सीजन व्यवस्था की जा रही है ,तो ऐसे गुरुद्वारा कमेटी के द्वारा इन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर अब आसानी से मिलने लगा है। इसमें पुलिस के  द्वारा रास्तों में जगह-जगह रोका जाता है। उनकी प्रताड़ना को सुना जाता है सब कुछ हकीकत बताने पर रास्ते भी खुलते हैं। दो बार बच्चों के हल्के फुल्के एक्सीडेंट भी हुए हैं। क्योंकि ऑक्सीजन सिलेंडर बड़ा है। बाइक पर लाना कठिनाई का खेल है। पर क्या करें मजबूरी है मां को जिंदा रखना जरूरी है। बच्चों के अंदर जब ऑक्सीजन सिलेंडर ले लेने जाते हैं तो दिल और दिमाग में वही भावना रहती है जिस प्रकार हनुमान ने सूर्य उदय होने से पहले लक्ष्मण जी के लिए संजीवनी बूटी लेकर आए। हनुमान को लक्ष्मण के प्राण बचाने थे संजीवनी बूटी से यहां मां के प्राण बचाने हैं ऑक्सीजन से बच्चों की मां विश्वास है अपने बच्चों वह सेवादारों के भरोसे चल रही है ।यही चिंता सताती है कि सुबह सिलेंडर मिलेगा या नहीं उन्हें ऐसा ही लगता है अगर ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिला तो मैं तो राम को प्यारी हो जाऊंगी, इन बच्चों का क्या होगा। पर इन सब का जुम्मा जिले के अंदर ऐसी पीड़ित बीमारू हालात में पड़े लोगों के लिए गुरुद्वारा सिंह सभा सामने आया है जिनके भरोसे संजीवनी से जीवन दान मिल रहा है। वही क्षेत्रीय सांसद का लक्ष्मणगढ़ में आगमन जब होता है। जनता क्षेत्र में ऑक्सीजन प्लांट लगाने की बात कहती है। सांसद महोदय इस बात को कहते हैं की लक्ष्मणगढ़ में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं, यह बच्चे क्यों अपनी मां के लिए 100 किलोमीटर चक्कर लगाते हैं सांसद महोदय को इस पर विचार करना चाहिए लक्ष्मणगढ़ में कोरोना से कई मौतें भी हो चुकी हैं। वो कहते हैं यहां कोरोना नहीं, नाही ऑक्सीजन की कमी, यहां तो प्रकृति में स्वत: ही ऑक्सीजन विद्यमान है। जब प्रकृति में सब कुछ विद्यमान  होता लक्ष्मणगढ़ में ऑक्सीजन की किल्लत नहीं होती तो इस महिला के लिए अब तक 30 सिलेंडर ऑक्सीजन के लग चुके हैं आखिर वह क्यों लगवाए गए सोचना चाहिए यहां के जिम्मेदार राजनीतिक एक संत सांसद को जनता ने अपना मत दिया है यह जनता के लिए श्वास नहीं जुटा सकते। पर इन्हें तो अपने क्षेत्र की पड़ी है स्वास की कमी ऑक्सीजन की कमी राठ क्षेत्र में है बहरोड बानसूर में है लक्ष्मणगढ़ पर ईश्वर की कृपा है और क्षेत्र की जनता भी यही दुआ करती है कि सांसद महोदय अपने क्षेत्र में ही किल्लत बनी रहे आपके क्षेत्र में ही ऑक्सीजन प्लांट लगे हम पर तो ईश्वर की कृपा दृष्टि बनी रहे।

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