बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान के तहत विद्यालयों में बालिका शिक्षा एवं आत्मरक्षा की कार्यशाला का हुआ आयोजन

Mar 2, 2021 - 01:09
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बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान के तहत विद्यालयों में बालिका शिक्षा एवं आत्मरक्षा की कार्यशाला का हुआ आयोजन

नीमराना (अलवर,राजस्थान/ चरण सिंह) बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान के तहत सोमवार को कस्बा के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय एवं महात्मा गांधी राजकीय विद्यालयों में बालिका शिक्षा एवं आत्मरक्षा की एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम समारोह की अध्यक्षता मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सुभाषचंद्र यादव ने की। कार्यक्रम में मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सुभाषचन्द्र यादव ने बालिकाओ को जीवन का महत्व एवं शिक्षा का हमारे जीवन मे क्या महत्व है के बारे में बताया तथा शारीरिक शिक्षकों से आत्मरक्षा के गुर बालिकाओ को प्रति दिन बताये जाने के लिए कहा। महिला अधिकारिता विभाग की जिला समन्वयक दीपाक्षी शर्मा, महिला सुपरवाइजर कीर्ति बोरोलिया ने महिला शक्ति केन्द्र एवं महिला अधिकारिता विभाग द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान के तहत कार्यशाला में उपस्थित बेटियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि हमें बेटा बेटी में फर्क नहीं समझना चाहिए। बेटियाँ बेटों से किसी भी क्षेत्र में कम नही हैं। स्वच्छता एवं नॉर्मल खानपान का ध्यान रखना चाहिए। बालिकाओं को महावारी के दौरान घबराने की जरूरत नहीं है। यह महिलाओं के लिए प्रकृति की देन है, इस दौरान कोई शर्म नहीं करनी चाहिए, बल्कि बेहिचक होकर इस बारे सुझाव सांझा करने चाहिए। उन्होंने कहा कि इस दौरान शरीर की स्वच्छता का पूरा ध्यान रखते हुए जंक फूड आदि खाने से परहेज करना चाहिए। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना, राजश्री योजना, बालिकाओं के लिए निःशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण के बारे में विस्तार पूर्वक बताया गया। समाज मे हो रहे बाल विवाह को रोकने के लिए सरकार द्वारा अनेक कानून बनाये गये है। जिसमे बाल विवाह में भाग लेने वाले व अभिभावकों को 2 साल की सजा व 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। सामाजिक बदलाव हमें अपने से ही करना होगा।  महिला सुपरवाइजर कीर्ति बोरोलिया द्वारा राजस्थान सम्पर्क 181, वन स्टॉप सेंटर व महिला सलाह एवं सुरक्षा केन्द्र के बारे में विस्तार से बताया गया। जिसमें महिला के साथ किसी भी तरह की अत्याचार या घरेलू हिंसा होने पर महिला द्वारा 181 पर फ़ोन कर सूचना दे सकते है। वन स्टॉप सेंटर पर पीड़ित महिला को अधिकतम 5 दिवस का अस्थायी आवास की सुविधा दी जाती है। जिसमे उसे मेडिकल सुविधा, पुलिस सुविधा, कॉउंसलिंग सुविधा व रहने खाने की सभी सुविधा महिला को निःशुल्क दी जाती है। इंदिरा महिला शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना के बारे में बताया गया। महिलाओं की समाज में बहुत बड़ी भागीदारी होती है। महिलाओं को अपने साथ हो रहे अत्याचारों के संबंध में आवाज उठानी चाहिए। समाज में बाल विवाह, दहेज प्रथा जैसी कुप्रथाओं को रोकने के लिए प्रयास करने चाहिए। जागरूक महिलाएं ही समाज में ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को जागरूक कर सकती है, और जिससे जागरूकता पैदा होगी। इस अवसर पर महिलाओं एवं बालिकाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में प्रधानाचार्य लीलाराम, प्रधानाचार्य नरेन्द्रसिंह चौहान ने भी अपने विचार रखे।

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