देश में कानून का राज हो बुलडोजर का नही, पीएम-सीएम को कोई अधिकार नहीं किसी का घर तोड़ें: राजस्थान के सीएम गहलोत

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुलडोजर से अपराधियों के मकानों को तोड़ने को लेकर बयान जारी कर कहा है कि- देश में कानून का राज हो बुलडोजर का नही, पीएम-सीएम को कोई अधिकार नहीं किसी का घर तोड़ें। सीएम गहलोत ने ये बयान पत्रकारों के साथ हुई वार्ता के दौरान दिया।

देश में कानून का राज हो बुलडोजर का नही, पीएम-सीएम को कोई अधिकार नहीं किसी का घर तोड़ें: राजस्थान के सीएम गहलोत

पत्रकार वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक यात्राएँ पहले भी हुई हैं और यह कांग्रेस की परंपरा रही है, गांधी जी के वक्त से दांडी मार्च हुआ था, तबसे ही और साबरमती आश्रम से प्रारंभ हुई यात्रा, एआईसीसी का प्रोग्राम है तो आप समझ सकते हैं कि इसका क्या मकसद है। जो अभी बताया गया आपको और आप लोग समझ रहे हैं कि देश के अंदर जो हालात हैं वो बहुत चिंताजनक हैं। आज संविधान की धज्जियां उड़ रही हैं, हम बार-बार कहते है, लोकतंत्र खतरे में है, इनकम टैक्स, सीबीआई और ईडी को छोड़ रखा है, पीछे लगा रखा है, देश का उद्यमी डरा हुआ है, व्यापारी डरा हुआ है, आम नागरिक डरा हुआ है कि पता नहीं कल क्या होगा?

बुलडोजर की राजनीति हो रही है, यूपी में चुनाव क्या जीत गए और घमंड आ गया इनको कि बुलडोजर का एक मैसेज देंगे और लोग समझ जाएंगे। अब बुलडोजर चल रहे हैं मध्यप्रदेश के अंदर, वो शिवराज सिंह जी भी कंम्पीटिशन में आ गए योगी जी के, यह कब तक चलेगा? आप निर्दोष लोगों के घरों में जाकर बुलडोजर चला रहे हो, जब कोई दंगा होता है जो कि बहुत अनफार्च्यूनेट होता है, उसकी निंदा करनी चाहिए, शांति, सद्भाव, भाईचारा, प्रेम रहे देश के अंदर, यह कांग्रेस का हमेशा से इतिहास रहा है और दंगा हो भी जाता है, जैसे करौली के अंदर दंगा हो गया या दुकानें जला दी गईं, तो जो पकड़े गए उसमें ये खुद कहते हैं कि निर्दोष लोग भी थे उसके अंदर, हो सकता है निर्दोष भी होंगे, तफ्तीश में वापस नाम निकल जाएंगे, तो मध्यप्रदेश के अंदर भी अगर मान लीजिए निर्दोष लोग पकड़े गए, हो सकता है निर्दोष हों उसके अंदर, आपने तो निर्दोष और दोष कोई मतलब नहीं है, मुख्यमंत्री की खुद की छवि कैसे बने? सरकार ने बहुत बोल्ड स्टेप उठाया है, यह बोल्ड स्टेप है क्या? किसी के घर तोड़ दो गरीबों का, आंखों में आंसू आते हुए देखा मैंने परसों रात को टीवी के अंदर, क्या तरीका है यह? बुलडोजर इसी काम के लिए है क्या?

कोर्ट के आदेश होते हैं, कभी कोई तोड़ने की नौबत भी आती है तो कोर्ट के आदेश से तोड़ सकते हैं। मैंने कल भी कहा मुख्यमंत्री-प्रधानमंत्री को कोई अधिकार नहीं है कि वो सीधा ही कह दे कि तुम जाकर तोड़ दो किसी के मकान को, उनको अधिकार नहीं है। तो आप सोच सकते हो किसको अधिकार है? कानून का राज होना चाहिए। आज कानून का राज समाप्त हो रहा है, इसीलिए यह यात्रा निकल रही है। यह संदेश देगी घर-घर के अंदर, पूरे प्रदेश के अंदर, पूरे देश के अंदर कि कानून का राज स्थापित हो, संविधान की रक्षा हो, लोकतंत्र मजबूत हो, इसका संदेश देने के लिए यात्रा मैं समझता हूं जो निकल रही है, पूरे देश में संदेश जाएगा और पूरे प्रदेशवासियों को चाहिए कि इस यात्रा का स्वागत करें। इनका स्वागत करने का मायने हैं कि देश के आम लोगों का स्वागत है कि भई सबमें शांति, भाईचारा, प्रेम कैसे पैदा हो, जो बिगाड़ने का षड़यंत्र कर रहे हैं, यह स्थिति है। इसलिए बहुत जरूरी था यह यात्रा निकालना।

मैं सोनिया जी को, राहुल जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि जो मार्ग चुना इसका यात्रा का, वो मार्ग राजस्थान से होकर चुना है और अधिकांश भाग राजस्थान से अभी अध्यक्ष जी बता रहे थे आपको, निकलेगा। पूरे प्रदेश के अंदर वेलकम करने के लिए उत्सुकता है लोगों के अंदर, कार्यकर्ताओं में, अच्छे ढंग से यात्रा सफल होगी, यह मेरी बात है।

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  • Ram kishan
    Ram kishan
    गहलोत साहब उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश तो आप तुरंत से पहुंच जाते हो कि वहां पर आरोपियों के घरों पर बुलडोजर क्यों चलाए जा रहे हैं आपकी बातों से तो लगता है कि पत्थरबाज और अपराधी निर्दोष और बेगुनाह लग रहे हैं लेकिन आप स्वयं के प्रदेश को छोड़कर बाहर ताका झांकी कर रहे हैं यह किस हद तक उचित है शायद दो तीन दिवस पूर्व की एक घटना भी आपको पता हो कि अलवर जिले के राजगढ़ में कई धार्मिक व पौराणिक भावना से जुड़े मंदिर और कुछ ग्रामीणों के घर मास्टर प्लान के तहत तोड़ दिए लेकिन प्रदेश में धार्मिक भावनाओं को ठेस लगातार पहुंचाई जा रही है और रही आप के मास्टर प्लान की बात तो मेरे हिसाब से सुप्रीम कोर्ट ने मास्टर प्लान के तहत किसी का घर या मकान तोड़ने से पूर्व उसे मुआवजा देने का प्रावधान भी बताया है लेकिन राजगढ़ में आपकी सरकार के चलते जो मकान तोड़े गए हैं अभी तक उन्हें पूरी भी मुआवजा नहीं दिया गया जब एसडीएम साहब से पूछा गया तो उन्होंने कह दिया कि बैठक में अधिकारियों ने मुआवजे का कोई प्रस्ताव नहीं रखा गहलोत साहब आपने सुना तो होगा बुजुर्ग लोग भी कहते हैं कि जिनके घर शीशे के होते हैं वह दूसरे के घर में पत्थर नहीं मारते जब आपके प्रदेश में ही ऐसा हो रहा है तो दूसरे प्रदेशों में ताका झांकी करने से पहले अपने प्रदेश पर ध्यान दिया जाए तो उचित रहेगा
    4 months ago Reply  Like (2)