खैरथल नगर परिषद के नए बोर्ड को एक माह बाद भी पहली बैठक का इंतजार; सफाई-अतिक्रमण पर कार्रवाई शुरू, जल संकट समाधान की बारी
खैरथल (हीरालाल भूरानी) नगर परिषद के नए बोर्ड के लेकिन अब तक पहली बैठक नहीं हो गठन को एक माह बीत चुका है, पाई है। सभापति विक्रम चौधरी के नेतृत्व में बाजारों से अतिक्रमण हटाने और वार्डों में सफाई अभियान की शुरुआत जरूर हुई है, लेकिन शहरवासियों की निगाहें अब परिषद की आगामी कार्ययोजना पर टिकी है। लोगों को उम्मीद है कि पहली बैठक में पेयजल संकट, प्रशासनिक व्यवस्था, कर्मचारियों की उपलब्धता और विकास कार्यों जैसे अहम अहम मुद्दों पर ठोस निर्णय लिए जाएंगे।
श्राद्ध पक्ष और पारिवारिक दुखांतिका से टली बैठकः
नगर परिषद सभापति पद के चुनाव में 21 सितंबर को भाजपा के विक्रम चौधरी ने जीत दर्ज की थी। मुकाबले में दोनों पक्षों को 22-22 मत मिलने के बाद लॉटरी से उनके पक्ष में परिणाम आया। अगले दिन 22 सितंबर को उपसभापति पद के चुनाव में कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी सुमित रोघा विजयी हुए। श्राद्ध पक्ष शुरू होने से पहले सभापति ने औपचारिक रूप से कार्यभार संभाल लिया था, लेकिन श्राद्ध पक्ष और उनके परिवार में हुई दुखद घटना के चलते बोर्ड की पहली बैठक नहीं हो सकी।
अतिक्रमण हटाने से बाजारों में दिखा बदलावः
कार्यभार संभालने के बाद सभापति ने बाजारों में अतिक्रमण हटाने पर जोर दिया। उनकी मौजूदगी में दुकानों के बाहर बने चबूतरों को हटाने की कार्रवाई हुई, जिससे रास्ते सुगम हुए और सड़कें पहले की तुलना में में चौड़ी नजर आने लगीं। हालांकि, प्रमुख बाजारों में दुकानों के बाहर लगे टीन शेड हटाने से व्यापारियों में नाराजगी भी सामने आई। व्यापारियों का कहना था कि ये शेड बारिश और तेज धूप से बचाव करते थे। इसके बाद प्रमुख विपक्षी दल के नेताओं ने विधायक दीपचंद खैरिया की अगुवाई में अतिरिक्त जिला कलक्टर से मुलाकात कर व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप की मांग की।
18 वार्डो में चरणबद्ध सफाई अभियानः
सभापति के निर्देश पर शहर में चरणबद्ध तरीके से सफाई कराई जा रही है। पहले चरण में वार्ड एक से दस और दूसरे चरण में वार्ड 11 से 18 तक अभियान चलाया गया। इस दौरान लंबे समय से गंदगी से भरी नालियों और नालों की सफाई के साथ सड़कों पर जमा कचरा हटाया गया। सड़क किनारे उगी घास की भी कटाई कराई गई। इन प्रयासों के बीच शहरवासियों का कहना है कि नियमित सफाई के साथ जल निकासी की व्यवस्था को भी दुरुस्त करना जरूरी है, ताकि समस्याएं दोबारा नहीं उभरें
पेयजल संकट और प्रशासनिक ढांचे में सुधार की दरकारः
शहर की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या अब भी प्रमुख चिंताओं में शामिल है। लोगों को उम्मीद है कि पहली बैठक में इसके स्थायी समाधान के लिए कार्ययोजना बनाई जाएगी। इसके साथ ही अन्य विभागों में प्रतिनियुक्ति या दूसरी व्यवस्थाओं के तहत कार्यरत परिषद कर्मचारियों को वापस लाने की दिशा में पहल की अपेक्षा है, ताकि नियमित कामकाज प्रभावित नहीं हो।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नगर परिषद की पहली बैठक कब होगी और उसमें शहर की बुनियादी समस्याओं को लेकर क्या निर्णय लिए जाएंगे। अतिक्रमण हटाने और सफाई अभियान के बाद शहरवासियों को उम्मीद है कि नया बोर्ड पेयजल, प्रशासनिक व्यवस्था और विकास कार्यों को प्राथमिकता देकर समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएगा।

