जिला परिषद और पंचायत चुनाव में दिग्गजों की सीधी एंट्री; पूर्व मंत्री-विधायक, नेताओं के बेटे-बेटी और रिश्तेदार मैदान में; जिला प्रमुख की कुर्सी पर टिकी निगाहें, स्थानीय कार्यकर्ताओं में नाराजगी
उदयपुर (राजस्थान) उदयपुर जिले में हो रहे जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों में इस बार सियासत का दिलचस्प और नया ही रंग देखने को मिल रहा है। स्थानीय कार्यकर्ताओं को मौका मिलने के बजाय दोनों ही प्रमुख दलों ने बड़े नेताओं और उनके परिजनों को चुनावी मैदान में उतार दिया है। अनारक्षित जिला प्रमुख पद और भविष्य के राजनीतिक समीकरणों को साधने के लिए कई पूर्व मंत्री, विधायक और दिग्गज खुद या अपने रिश्तेदारों के साथ ताल ठोक रहे हैं।
- दिग्गज नेता और उनके परिवार मैदान में
इस बार के चुनाव में कई बड़े सियासी चेहरे आमने-सामने हैं। गोगुंदा से तीन बार विधानसभा चुनाव हार चुके पूर्व मंत्री मांगीलाल गरासिया सायरा पंचायत समिति के वार्ड-9 से सदस्य का चुनाव लड़ रहे हैं, जहाँ प्रधान पद एसटी वर्ग के लिए आरक्षित है। वहीं, मावली के जिला परिषद वार्ड-43 में कांग्रेस विधायक पुष्करलाल डांगी के बेटे शांतिलाल डांगी और भाजपा के पूर्व विधायक दलीचंद डांगी के बीच कड़ा मुकाबला है। इसी प्रकार, उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा ने अपनी बेटी संजना मीणा को वार्ड-28 से जिला परिषद का टिकट दिलाया है। झाड़ोल के पूर्व विधायक हीरालाल दरांगी की बेटी अनीता दरांगी फलासिया पंचायत समिति के वार्ड-12 से मैदान में हैं।
कांग्रेस नेता विवेक कटारा भी गिर्वा पंचायत समिति के वार्ड-4 (पडूणा) से सदस्य पद का चुनाव लड़ रहे हैं। इनके अलावा भाजपा से डॉ. चंद्रगुप्त सिंह चौहान, हिम्मत सिंह झाला, घनश्याम मेनारिया और कांग्रेस से लालसिंह झाला व राजसिंह झाला भी जिला परिषद के चुनाव लड़ रहे हैं। चर्चा थी कि उदयपुर सांसद मन्नलाल रावत की पत्नी रजनी पी. रावत भी चुनाव लड़ेंगी, लेकिन ऐन वक्त पर वे पीछे हट गईं।
- जिला प्रमुख और प्रधान पद पर पैनी नजर
उदयपुर जिला प्रमुख का पद इस बार अनारक्षित होने के कारण राजनीतिक दलों ने सामान्य और ओबीसी वार्डों में अपने वरिष्ठ नेताओं को उतारा है। भाजपा से डॉ. चंद्रगुप्त सिंह चौहान और हिम्मत सिंह झाला मैदान में हैं, जबकि कांग्रेस से पूर्व जिलाध्यक्ष लालसिंह झाला व युवा नेता राजसिंह झाला ताल ठोक रहे हैं। भाजपा का बोर्ड बनने पर हिम्मत सिंह झाला, घनश्याम मेनारिया और डॉ. चौहान जिला प्रमुख की दौड़ में सबसे आगे हैं, वहीं कांग्रेस की जीत पर लालसिंह और राजसिंह झाला प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं।
- विधानसभा चुनाव की तैयारी और आदिवासी अंचल का समीकरण
कई नेता आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी ज़मीन मजबूत करने के लिए इन चुनावों में उतरे हैं। आदिवासी अंचल कोटड़ा और झाड़ोल क्षेत्र में भी राजनीतिक परिवारों का दबदबा देखने को मिल रहा है। पूर्व प्रधान मुरारीलाल बुंबरिया, निर्मल गरासिया और कैबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी के ससुराल पक्ष से जुड़ी पूर्व प्रधान सुगना देवी तथा उनके रिश्तेदार बाबूलाल लऊर (शिक्षक पद से इस्तीफा देकर) भी पंचायत समिति चुनाव लड़ रहे हैं।
- कार्यकर्ताओं में पनप रही है नाराजगी
दिग्गज नेताओं और उनके परिवारों को सीधे टिकट मिलने से जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं में रोष देखा जा रहा है। वर्षों से पार्टी का काम संभाल रहे और रैलियों-कार्यक्रमों में सक्रिय रहने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनकी अनदेखी की जा रही है। यही वजह है कि कई क्षेत्रों में कार्यकर्ता मन से समर्थन देने के बजाय केवल औपचारिकता निभाते नजर आ रहे हैं।

