बनोड़ा हत्याकांड: पुलिस की थ्योरी पर ग्रामीणों का 'अविश्वास', कलेक्टर कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन
सलूंबर। सलूंबर के बनोड़ा गांव में 6 मई को हुई बुजुर्ग महिला की नृशंस हत्या का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। बुधवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर और जिला पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर पुलिस की जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस असली गुनहगारों और इस हत्याकांड के पीछे सक्रिय 'गैंग' को बचाने का प्रयास कर रही है।
बुधवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस हत्याकांड के पीछे एक पूरी गैंग का हाथ है और पुलिस असली दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है। ग्रामीणों ने कहानी को मनगढ़त बताया ग्रामीणों ने पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपी के बयानों और घटनाक्रम की कहानी को मनगढ़ंत बताया। उनका कहना है कि पुलिस की जांच उनकी समझ से परे है और कई अहम सवालों के जवाब नहीं दे रही है। समाजसेवी महावीर पटेल, वेलाराम वाकवात और वीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में पहुंचे ग्रामीणों ने पुलिस की थ्योरी पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि एक वृद्ध महिला की हत्या कर शव को ठिकाना लगाना अकेले व्यक्ति का काम नहीं हो सकता, इसमें निश्चित तौर पर अन्य सहयोगी शामिल हैं। ग्रामीणों के अनुसार, पुलिस का दावा है कि हत्या कहीं और हुई, जबकि उनका मानना है कि महिला का गला उसके अपने घर के अंदर दबाया गया था। इसके अलावा, ग्रामीणों ने दावा किया कि शव को दिन के उजाले में नहीं, बल्कि गहरी रात में जंगल में ले जाया गया ताकि कोई देख न सके। व्यापारी का नाम सार्वजनिक करने की मांग ग्रामीणों ने इस बात पर भी कड़ा रोष व्यक्त किया कि पुलिस ने लूटे गए चांदी के कड़े तो बरामद कर लिए हैं, लेकिन उस व्यापारी का नाम उजागर नहीं किया जिसने चोरी का माल खरीदा। ज्ञापन में मांग की गई है कि उस व्यापारी का नाम सार्वजनिक किया जाए और उसे भी सह-आरोपी बनाया जाए। इस प्रदर्शन की खास बात यह रही कि बनोड़ा गांव से बड़ी संख्या में महिलाएं भी सलूंबर कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि जब तक पूरी गैंग का पर्दाफाश नहीं होता और लूटे गए गहनों के खरीदार का नाम सामने नहीं आता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।


