तृणमूल में बगावत तेज, कोलकाता में टीएमसी की हाई-लेवल बैठक; ममता बनर्जी के लोकसभा चुनाव लड़ने की अटकलें तेज

Jun 6, 2026 - 12:11
Jun 6, 2026 - 12:20
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तृणमूल में बगावत तेज, कोलकाता में टीएमसी की हाई-लेवल बैठक; ममता बनर्जी के लोकसभा चुनाव लड़ने की अटकलें तेज

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची अंदरूनी कलह और बगावत की खबरों के बीच, शुक्रवार को पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर एक महत्वपूर्ण हाई-लेवल बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में जनप्रतिनिधियों की सीमित भौतिक उपस्थिति को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

बैठक में उपस्थिति पर टीएमसी की सफाई

पार्टी के बड़े संख्या बल (42 सांसद और 80 विधायक) के मुकाबले बैठक में व्यक्तिगत रूप से केवल 14 जनप्रतिनिधि (8 विधायक और 6 सांसद) ही मौजूद रहे। इसे लेकर उठ रहे सवालों पर तृणमूल कांग्रेस ने तत्काल सफाई जारी की है। पार्टी द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया:

"यह सभी विधायकों या सांसदों की सामान्य बैठक नहीं थी, बल्कि यह 'नेशनल वर्किंग कमेटी' (NWC) की बैठक थी। महुआ मोइत्रा, सुष्मिता देव, मुकुल संगमा और राजेश त्रिपाठी सहित कमेटी के कई अन्य सदस्य इस बैठक में वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए थे।"

संगठन और विधानसभा में बगावत के सुर

रिपोर्ट्स के अनुसार, टीएमसी को इस समय संगठन के भीतर कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। विधानसभा में पार्टी से निष्कासित नेता रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में 57 विधायकों ने बागी रुख अपना लिया है, जिन्हें स्पीकर रथिंद्र बोस से मान्यता मिलने के बाद बागी गुट द्वारा नेता प्रतिपक्ष (LoP) घोषित किया गया है। इसके अतिरिक्त, संसद के दोनों सदनों में भी कुछ सदस्यों द्वारा असंतोष जाहिर करने और अन्य राजनीतिक विकल्पों पर विचार करने की खबरें सामने आ रही हैं।

ममता बनर्जी के लोकसभा जाने की चर्चा

वर्ष 2026 के विधानसभा चुनावों में भवानीपुर सीट पर आए नतीजों के बाद, अब यह अटकलें तेज हैं कि पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी संसदीय राजनीति का रुख कर सकती हैं। सूत्रों के अनुसार, टीएमसी अपने लोकसभा सांसद यूसुफ पठान से बहरामपुर की सीट खाली करने का अनुरोध कर सकती है, ताकि ममता बनर्जी वहां से चुनाव लड़ सकें। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी का निचले सदन (लोकसभा) में जाना पार्टी के भीतर सांसदों की बगावत को शांत करने और राष्ट्रीय स्तर पर नियंत्रण मजबूत करने की एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

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