'PM is Compromised' भारत-अमेरिका ट्रेड डील में देश की संप्रभुता गिरवी रख रही मोदी सरकार - टीकाराम जूली
- विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों का जोरदार प्रदर्शन
- पंचायती राज और मनरेगा के बजट को लेकर जूली ने सदन में सरकार की वित्तीय विफलताओं की उड़ाई धज्जियां
राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने केंद्र व राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विधानसभा परिसर में प्रदर्शन के दौरान जूली ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर प्रधानमंत्री पर सीधा हमला बोला और बाद में सदन के भीतर पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास की अनुदान मांगों पर चर्चा करते हुए सरकार को आईना दिखाया।
- विदेशी ताकतों के आगे नतमस्तक सरकार, देश मांग रहा जवाब
विधानसभा परिसर में मीडिया से रूबरू होते हुए टीकाराम जूली ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील और सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर आज पूरा देश प्रधानमंत्री से स्पष्टीकरण मांग रहा है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा: "इस ट्रेड डील में भारत के किसानों और लघु व्यापारियों के हितों को दरकिनार कर दिया गया है। जिस तरह से सरकार ने आत्मसमर्पण किया है, उससे साफ झलकता है कि 'PM is compromised'। अपनी संप्रभुता को विदेशी ताकतों के आगे गिरवी रखना बेहद शर्मनाक है, जिसे देश कभी माफ नहीं करेगा।"
- संविधान की दुहाई देने वाली भाजपा ने पंचायती राज को किया 'पंगु'
सदन में चर्चा के दौरान जूली ने भाजपा के 'दोहरे चरित्र' पर प्रहार किया। उन्होंने याद दिलाया कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने नागौर की धरा से पंचायती राज का जो पौधा रोपा था, भाजपा उसे उखाड़ने पर तुली है।
संवैधानिक उल्लंघन: जूली ने गरजते हुए कहा कि नियमानुसार 5 साल में चुनाव होने चाहिए, लेकिन सरकार ने चुनाव अटकाकर प्रदेश का 3000 करोड़ रुपया केंद्र में फंसवा दिया। तीखा सवाल: "जो लोग संवैधानिक संस्थाओं का गला घोंट रहे हैं, वे किस मुंह से संविधान की बात करते हैं?"
- मनरेगा को खत्म करने का षड्यंत्र और 'वित्तीय दिवालियापन'
नेता प्रतिपक्ष ने मनरेगा (MGNREGA) के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस की इस क्रांतिकारी योजना से भाजपा को हमेशा 'पेट में दर्द' रहा है।
साजिश का खुलासा: केंद्र ने एक्ट में बदलाव कर राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ाकर नरेगा को धीरे-धीरे खत्म करने का चक्रव्यूह रचा है। पहले केंद्र का हिस्सा 90% था, जिसे अब राज्य पर थोपा जा रहा है।
सरकार को चुनौती: "क्या आपमें 125 दिन का रोजगार देने की हिम्मत है? इसके लिए 21,000 करोड़ रुपये चाहिए, जबकि इस सरकार के पास तो कर्मचारियों को तनख्वाह देने के लिए भी धेला नहीं है।"
- मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरों पर तंज: "राजस्थान को क्या मिला?"
सरकार की कार्यप्रणाली पर कटाक्ष करते हुए जूली ने कहा कि मुख्यमंत्री रोज दिल्ली जाते हैं और दावा करते हैं कि 'व्यवस्था' करके ला रहे हैं, लेकिन हकीकत में राजस्थान के हाथ खाली हैं।
"जो सरकार 10% पैसा नहीं दे पा रही, वह 40% की हिस्सेदारी कहां से निभाएगी? पहले तीन काले कानून और अब ट्रेड डील में सरेंडर? भाजपा ने किसानों के साथ विश्वासघात की पराकाष्ठा पार कर दी है। याद रहे, गरीब और किसान की हाय बहुत बुरी होती है।"