भगवान ऋषभदेव के 'जियो और जीने दो' के सिद्धांत ही विश्व शांति का मार्ग: आर्यिका संगममति माताजी
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कोयला में 'ऋषभदेव पखवाड़े' के तहत आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित
बामनवास (गंगापुर सिटी ) उपखण्ड क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कोयला में शिक्षा विभाग के आदेशानुसार नवीन शिक्षण सत्र के शुभारंभ पर 'ऋषभदेव पखवाड़ा' श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर गणिनी आर्यिकारत्न 105 श्री संगममति माताजी एवं उनके संघ का सानिध्य प्राप्त हुआ, जहाँ उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन जीने की कला और नैतिक मूल्यों की शिक्षा दी।
- आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ कार्यक्रम का आगाज
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानाचार्य अनिता मीणा द्वारा भगवान ऋषभदेव और मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात विद्यार्थियों ने ऋषभदेव भगवान की स्तुति की, जिससे संपूर्ण विद्यालय परिसर सकारात्मक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो गया। वर्धमान कोचिंग की निदेशक एकता जैन ने प्रधानाचार्य का स्वागत किया, वहीं शिक्षक बाबूलाल जैन ने भगवान ऋषभदेव के जीवन परिचय पर प्रकाश डाला।
विशेष प्रवचन: भारत नाम और लिपि के उद्गम का महत्व
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए आर्यिका संगममति माताजी ने बताया कि भगवान ऋषभदेव ने युग के प्रारंभ में समाज को व्यवस्थित करने के लिए वर्णों की स्थापना की और अनुशासन का पाठ पढ़ाया।
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देश का नाम 'भारत': आर्यिका संयोमती माताजी ने जानकारी दी कि ऋषभदेव के पुत्र चक्रवर्ती सम्राट भरत के नाम पर ही हमारे देश का नाम 'भारत' पड़ा।
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शिक्षा की नींव: उन्होंने बताया कि उनकी पुत्रियों ब्राह्मी और सुन्दरी ने ही विश्व को 'लिपि' और 'अंक विद्या' का ज्ञान दिया, जिसकी बदौलत आज हम पढ़-लिख पा रहे हैं।
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क्षुल्लिका सम्पर्कमति, सानिध्यमति और समर्पितमति माताजी ने बच्चों को माता-पिता व गुरुओं का सदा सम्मान करने की सीख दी।
प्रधानाचार्य अनिता मीणा ने कहा कि शिक्षा विभाग की यह अभिनव पहल विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखार रही है। वर्तमान समय में भगवान ऋषभदेव के "जियो और जीने दो" तथा शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के सिद्धांत ही विश्व को सही दिशा दिखा सकते हैं। स अवसर पर विद्यालय स्टाफ के मनोज कुमार मीणा, राधेशयम मीणा, धर्मसिंह मीणा, बाबूलाल जैन सहित समस्त शिक्षकगण और वर्धमान दिगंबर जैन विकास समिति के सदस्य सुनील कुमार जैन, सुमनलता जैन व अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।


