झालावाड़ में सुरक्षित मातृत्व की अनूठी पहल: हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को बिना डोनर मिलेगा तत्काल रक्त, अस्पताल में हर कदम पर साथ रहेगी 'प्रसव सखी
झालावाड़ में स्वास्थ्य विभाग का बड़ा कदम: एचआरपी गर्भवतियों के लिए शुरू हुई 'प्रसव सखी' और निःशुल्क रक्त उपलब्धता की विशेष व्यवस्था
झालावाड़: जिले में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने दो महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल की हैं। अब हाई रिस्क गर्भवतियों को जरूरत पड़ने पर बिना किसी रिप्लेसमेंट डोनर के तत्काल रक्त उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही, अस्पताल में भर्ती होने से लेकर डिस्चार्ज होने तक उनके साथ हर कदम पर 'प्रसव सखी' मौजूद रहकर मदद करेगी। इतना ही नहीं, जिला मुख्यालय स्थित हीरा बा कंवर जनाना अस्पताल में प्रसूता हेल्प डेस्क का भी शुभारंभ कर दिया गया है।
रक्त के लिए नहीं भटकना पड़ेगा, 26 जुलाई को लगेंगे विशेष शिविर
जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ के विशेष निर्देशों पर शुरू की गई इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को समय पर राहत पहुंचाना है। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के दौरान कई बार अचानक रक्त की जरूरत पड़ने पर परिजनों को डोनर ढूंढने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
इसी समस्या के समाधान के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. साजिद खान ने बताया कि 26 जुलाई को जिला मुख्यालय के साथ-साथ चौमहला, रटलाई, मनोहरथाना, पिड़ावा और अन्य प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में बड़े पैमाने पर रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में चिकित्साकर्मी, नर्सिंग स्टाफ, एएनएम यूनियन और स्वैच्छिक रक्तदाता भाग लेंगे। शिविरों में संग्रहित रक्त को मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर एचआरपी महिलाओं को बिना रिप्लेसमेंट के तुरंत रक्त मिल सके।
हर चरण में संबल बनेगी 'प्रसव सखी'
राज्य सरकार द्वारा लागू की गई 'प्रसव सखी' व्यवस्था गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी, समय पर इलाज, प्रभावी रेफरल और सुरक्षित संस्थागत प्रसव को और अधिक मजबूत बनाएगी। जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी (डीआरसीएचओ) डॉ. मुकेश कुमार नागर ने बताया कि प्रशिक्षित नर्सिंग कर्मियों, एएनएम या अन्य महिला स्वास्थ्यकर्मियों को प्रसव सखी के रूप में तैनात किया जाएगा।
यह प्रसव सखी गर्भवती महिला के पंजीयन से लेकर जांच, चिकित्सकीय परामर्श, विशेषज्ञों से समन्वय, सुरक्षित प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल तक हर चरण में साए की तरह साथ निभाएंगी। इसके अलावा, प्रत्येक चिन्हित अस्पताल में 24×7 मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य हेल्प डेस्क संचालित की जाएगी। वहीं, '104 जननी एक्सप्रेस', हेल्प डेस्क और प्रसव सखी के आपसी तालमेल से महिलाओं को घर से अस्पताल तक सुरक्षित परिवहन और निर्बाध सेवाएं मिल सकेंगी। चिकित्सा विभाग का मानना है कि इन ठोस पहलों से समय पर उपचार और रक्त मिलने से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आएगी।

