क्लेम खारिज करना बीमा कंपनी को पड़ा भारी:सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले युवक के परिजनों को मिलेंगे 31 लाख, 45 दिन में भुगतान का निर्देश
झालावाड़ उपभोक्ता आयोग का ऐतिहासिक फैसला: HDFC ERGO इंश्योरेंस को 31 लाख रुपये का क्लेम चुकाने का निर्देश, शराब के नशे का झूठा बहाना खारिज
झालावाड़ (राजस्थान)।
झालावाड़ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने सड़क दुर्घटना में मृत युवक के बीमा क्लेम खारिज करने के मामले में एचडीएफसी ईआरजीओ (HDFC ERGO) जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को करारा झटका दिया है। आयोग ने बीमा कंपनी के दावों को खारिज करते हुए पीड़िता को कुल 31 लाख रुपये का क्लेम, 9 प्रतिशत ब्याज, मानसिक संताप के 50 हजार और परिवाद व्यय के 20 हजार रुपये चुकाने का आदेश सुनाया है।
क्या था पूरा मामला? यह मामला खानपुर तहसील के देदिया गांव निवासी शिवानी मेघवाल द्वारा दायर परिवाद से जुड़ा है। शिवानी के पति जितेंद्र कुमार मेघवाल ने 15 जून 2024 से 14 जून 2025 तक की अवधि के लिए 'हेल्थ कोटी सुरक्षा बीमा योजना' पॉलिसी ली थी।
27 मार्च 2025 को जितेंद्र कुमार मेघवाल सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे और कोटा के एक अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी। घटना के बाद जब परिजनों ने बीमा कंपनी के पास क्लेम प्रस्तुत किया, तो कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि दुर्घटना के समय मृतक शराब के नशे में था।
आयोग ने झूठा पाया बीमा कंपनी का दावा बीमा कंपनी द्वारा क्लेम खारिज किए जाने के बाद पीड़िता शिवानी ने उपभोक्ता आयोग की शरण ली। आयोग के अध्यक्ष ईश्वरी लाल वर्मा और सदस्य वीरेंद्र सिंह रावत की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों व चिकित्सा साक्ष्यों की जांच की। जांच में पाया गया कि कंपनी का शराब के नशे वाला दावा निराधार था।
आयोग द्वारा दिया गया राहत का ब्योरा:
-
दुर्घटना मृत्यु क्लेम: ₹25 लाख (मुख्य बीमा राशि)
-
डिपेंडेंट चाइल्ड एजुकेशन बेनिफिट: आश्रित बेटे शिवम के लिए ₹2.50 लाख
-
पेरेंटल केयर बेनिफिट: मृतक के माता-पिता (कौशल्या बाई व शिवप्रसाद) के लिए ₹1.75-1.75 लाख (कुल ₹3.50 लाख)
-
मानसिक संताप क्षतिपूर्ति: ₹50,000
-
परिवाद व्यय: ₹20,000
45 दिन के भीतर भुगतान करने का कड़ा निर्देश आयोग ने निर्देश दिया है कि पूरी बीमा राशि पर परिवाद दायर करने की तिथि (16 अक्टूबर 2025) से भुगतान की तारीख तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा। अदालत ने बीमा कंपनी को इस आदेश के जारी होने की तिथि से 45 दिनों के भीतर समस्त राशियों का भुगतान सुनिश्चित करने की हिदायत दी है।

