अनोखा गांव, अजीब व्यवस्था: एक ही गांव के दो टुकड़े! बीच की एक नाली तय करती है पंचायत, तहसील और विधायक
रायसेन (मध्य प्रदेश) कमलेश जैन
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले का करहोला गांव इन दिनों अपनी एक अनोखी भौगोलिक स्थिति के चलते चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस गांव में विकास और प्रशासन की एक ऐसी अजब तस्वीर देखने को मिलती है, जो शायद ही देश के किसी अन्य हिस्से में नजर आती है। गांव के बीच से गुजरने वाली एक छोटी सी नाली ने पूरे गांव को दो अलग-अलग प्रशासनिक हिस्सों में बांट रखा है।
एक ही गांव, दो पंचायत और दो तहसीलें
करहोला गांव की भौगोलिक बनावट कुछ ऐसी है कि उसके बीच से निकलने वाली नाली ही सीमा का निर्धारण करती है। इस नाली के एक तरफ का हिस्सा एक ग्राम पंचायत और एक तहसील के अंतर्गत आता है, जबकि नाली पार करते ही दूसरी तरफ का हिस्सा पूरी तरह से दूसरी ग्राम पंचायत और दूसरी तहसील के अधीन हो जाता है।
ग्रामीणों के लिए यह स्थिति रोजमर्रा की जिंदगी में भारी सिरदर्द बन जाती है। जरा से काम या दस्तावेज बनवाने के लिए लोगों को पहले यह पता करना पड़ता है कि उनका घर नाली के किस पार आता है और उन्हें किस सरकारी दफ्तर के चक्कर काटने होंगे।
अलग-अलग विधानसभा क्षेत्र और विकास पर असर
प्रशासनिक सीमाओं का यह खेल यहीं खत्म नहीं होता। करहोला गांव के दोनों हिस्से दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के अंतर्गत आते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि एक ही गांव में रहने वाले पड़ोसी अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के मतदाता हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस अजीबोगरीब राजनीतिक और प्रशासनिक बंटवारे का सीधा असर गांव के विकास कार्यों पर भी पड़ता है। सीमा विवाद और अलग-अलग विभागों के अधिकार क्षेत्र में उलझने के कारण कई बार बुनियादी विकास के काम भी अटक जाते हैं, जिससे ग्रामीणों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

