श्रीकृष्ण की आठ पटरानियों का चरित्र वर्णन, सुदामा चरित्र से भावविभोर हुए श्रद्धालु
मेहरू कलां (बृजेश शर्मा) केकड़ी क्षेत्र के मेहरू कला गांव में आयोजित श्री नृसिंह-प्रहलाद महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के दौरान श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा स्थल पर कथा वाचक संत श्री रामदास महाराज के मुखारबिंद से श्रीमद् भागवत कथा का सजीव और भावपूर्ण वाचन किया गया। कार्यक्रम महंत श्री हरिदास महाराज के पावन सान्निध्य में संपन्न हुआ।
कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का विस्तार से वर्णन करते हुए कथा वाचक ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने आठ पटरानियों—रुक्मिणी, सत्यभामा, जाम्बवती, कालिंदी, मित्रविंदा, सत्या (नाग्नजिती), भद्रा और लक्ष्मणा—के साथ विवाह कर धर्म, मर्यादा और नारी सम्मान की स्थापना की। इसके साथ ही नरकासुर द्वारा बंदी बनाई गई 16,100 बालिकाओं को मुक्त कर उन्हें सम्मानपूर्ण जीवन प्रदान करने हेतु भगवान श्रीकृष्ण द्वारा विवाह रचाने की लीला का मार्मिक वर्णन किया गया, जिसे सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथा में सुदामा चरित्र का विशेष वाचन किया गया, जिसमें सच्ची मित्रता की पराकाष्ठा को दर्शाते हुए कृष्ण-सुदामा के पावन मिलन का भावपूर्ण चित्रण किया गया।
सुदामा की दरिद्रता, कृष्ण की करुणा और मित्रता की निस्वार्थ भावना ने श्रोताओं को गहरे तक प्रभावित किया। इस अवसर पर सुदामा-कृष्ण की आकर्षक झांकी सजाई गई, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही।
महोत्सव के दौरान बृज की होली का भी मनोहारी आयोजन किया गया। फूलों और गुलाल के साथ खेली गई बृज होली में श्रद्धालु भक्ति और आनंद में सराबोर नजर आए। भजन-कीर्तन और राधे-कृष्ण के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
संत समागम के इस पावन अवसर पर महंत श्री हरिदास महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भागवत कथा मानव जीवन को सत्कर्म, सेवा और भक्ति की दिशा में अग्रसर करती है। कथा वाचक संत श्री रामदास महाराज ने बताया कि श्रीमद् भागवत केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है, जो मानव को अहंकार से दूर कर प्रभु चरणों की ओर ले जाती है।
कथा के दौरान श्री नृसिंह भगवान एवं भक्त प्रहलाद की लीलाओं का भी विस्तार से वर्णन किया गया, जिसमें भक्ति की शक्ति और प्रभु की कृपा का संदेश दिया गया। महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
कार्यक्रम के अंत में आरती एवं प्रसादी वितरण किया गया। आयोजन समिति एवं ग्रामवासियों ने सभी संतों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।