पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में राम रहीम को किया बरी

Mar 7, 2026 - 19:21
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में राम रहीम को किया बरी

​चंडीगढ़/ शशि जायसवाल : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में बरी कर दिया है। हाईकोर्ट ने सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा 2019 में दी गई उम्रकैद की सजा को पलटते हुए कहा कि राम रहीम के खिलाफ साजिशकर्ता होने के पर्याप्त और ठोस सबूत नहीं मिले हैं।

​केस की मुख्य कड़ियां और कोर्ट का तर्क- ​हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस विक्रम अग्रवाल की पीठ ने सुनवाई के दौरान मामले की जांच में कई गंभीर खामियां पाईं। 

​गोली की फोरेंसिक जांच पर सवाल: कोर्ट में यह तथ्य सामने आया कि पोस्टमार्टम के दौरान मृतक के शरीर से निकाली गई गोली सीलबंद थी, लेकिन उसकी कभी फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) में जांच ही नहीं कराई गई। गोली पर फोरेंसिक एक्सपर्ट के हस्ताक्षर भी नहीं मिले, जिससे अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि वह वही गोली थी जिससे हत्या हुई।

रंजिश का प्रमाण नहीं: बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि केवल इस आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता कि पत्रकार डेरे के खिलाफ लिख रहा था। कोर्ट ने माना कि सीबीआई यह साबित करने में विफल रही कि राम रहीम उन खबरों को पढ़ता था या उसके मन में मृतक के प्रति कोई विशिष्ट रंजिश थी।

गवाहों के बदलते बयान: मुख्य गवाह खट्टा सिंह के बार-बार बयान बदलने और पहली चार्जशीट में राम रहीम का नाम न होने ने भी केस की कड़ी को कमजोर किया।

तीन दोषियों की सजा बरकरार-
​जहाँ राम रहीम को संदेह का लाभ मिला, वहीं कोर्ट ने इस हत्याकांड में शामिल तीन अन्य आरोपियों— कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। उनके खिलाफ चश्मदीद गवाह और प्रत्यक्ष साक्ष्य पर्याप्त पाए गए।

​राम रहीम की वर्तमान स्थिति: जेल में ही रहना होगा-
​भले ही राम रहीम को इस मर्डर केस और इससे पहले रणजीत सिंह हत्याकांड में हाईकोर्ट से राहत मिल गई हो, लेकिन उसे अभी जेल में ही रहना होगा। वह साध्वी यौन शोषण मामले में 2017 से दोषी है और 10 साल की सजा काट रहा है।

अंशुल छत्रपति ने जताया विरोध-
​पत्रकार के बेटे अंशुल छत्रपति ने इस फैसले पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा, "हमने 16 साल न्याय के लिए लड़ाई लड़ी थी। इस केस में कोई कानूनी खामी नहीं थी, सीबीआई ने मजबूत पैरवी की थी।" उन्होंने घोषणा की है कि वे हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे।

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