समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट हों देशवासी: प्रधानमंत्री मोदी

Oct 24, 2026 - 10:49
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समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट हों देशवासी: प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली (शशि जायसवाल) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन’ का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने सामाजिक एकता, नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाने और वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प में जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलते समय के साथ देश के सामने नई चुनौतियां और सामाजिक विकृतियां भी सामने आई हैं। इनसे निपटने के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने नागरिकों को जागरूक करने और विकसित भारत के लक्ष्य से प्रत्येक व्यक्ति को जोड़ने की आवश्यकता बताई।
चिन्मय मिशन को बताया विचार और चेतना का प्रतीक
प्रधानमंत्री मोदी ने चिन्मय मिशन की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक विचार है। स्वामी चिन्मयानंद ने वर्ष 1951 में इसकी स्थापना कर वेदांत और श्रीमद्भगवद्गीता के ज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया। गीता ज्ञान यज्ञों के माध्यम से उन्होंने आध्यात्मिक विचारों को जन-जन तक पहुंचाने में योगदान दिया।

प्रधानमंत्री ने वैदिक मंत्र ‘वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः’ का उल्लेख करते हुए राष्ट्र को जागरूक और सशक्त बनाने के सामूहिक दायित्व पर भी बल दिया।

स्वामी चिन्मयानंद के थ्री-डी स्वरूप से संवाद
सम्मेलन के दौरान स्वामी चिन्मयानंद के थ्री-डी होलोग्राम स्वरूप का अनावरण किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस डिजिटल स्वरूप के माध्यम से संवाद किया और चिन्मय मिशन की 75 वर्षों की यात्रा को आध्यात्मिक संकल्पों तथा सेवा भाव से जुड़ी यात्रा के रूप में प्रस्तुत किया।

भारतीय विरासत और संस्कृति पर दिया जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक परंपराएं भारत की पहचान को मजबूत करती हैं। उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या में श्रीराम मंदिर, महाकाल महालोक, केदारनाथ-बद्रीनाथ में विकास कार्यों और आदि शंकराचार्य की प्रतिमा जैसे उदाहरणों का उल्लेख किया। विदेशों से चोरी हुई प्राचीन मूर्तियों की वापसी को भी उन्होंने सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान से जोड़ा।

उन्होंने कहा कि चिन्मय मिशन से जुड़े युवा भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

25 अक्टूबर तक चलेगा वैश्विक सम्मेलन
23 से 25 अक्टूबर तक आयोजित इस तीन दिवसीय सम्मेलन में भारत और विदेशों से नौ हजार से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। यह आयोजन चिन्मय मिशन के 75वें वर्ष के अवसर पर पूरे साल चले कार्यक्रमों का समापन है।

सम्मेलन के दौरान वर्ष 2047 के लक्ष्य का भी उल्लेख किया गया। उस वर्ष भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होंगे और चिन्मय मिशन भी अपनी स्थापना के शताब्दी वर्ष की ओर बढ़ेगा। विकसित भारत के निर्माण और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण को इस साझा भविष्य की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में रेखांकित किया गया।

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