खैरथल में रावण की बदली काया: कुपोषण से निकले 51 फीट के 'दमदार' लंकापति पर उठे सवाल
खैरथल(हीरालाल भूरानी) साल 2024 में खैरथल के जिस रावण को देखकर लोग हंसते-हंसते लोटपोट हो रहे थे, उसकी हालत वाकई दयनीय थी। वह रावण इतना कुपोषित था कि उसके दस सिर तो दूर, एक सिर भी ठीक से दम नहीं भर पा रहा था। पेट गायब, टांगें कमजोर और कद-काठी ऐसी कि देखकर डर कम और दया ज्यादा आती थी—लगता था कि राम के तीर से पहले ही रावण खुद-ब-खुद दम तोड़ देगा! तब शहर में सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर रावण को बनाने के बजट का 'संतुलित आहार' कौन खा गया?
लेकिन कहते हैं ना कि वक्त बदलते देर नहीं लगती... इस बार कहानी पूरी तरह बदल चुकी है! इस बार मैदान में 51 फीट का भरा-पूरा, तंदुरुस्त और दमदार रावण खड़ा है।
- नगर पालिका से नगर परिषद तक का सफर और रावण की 'तंदुरुस्ती'
दिलचस्प बात यह है कि इस बीच खैरथल में नगर पालिका का दौर बीत गया और नगर परिषद का नया बोर्ड आ गया। बोर्ड बदलते ही रावण की सेहत भी रातों-रात सुधर गई। अब जनता के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि—आखिर पहले रावण कुपोषित था या उसके निर्माण का बजट? और अगर इस बार रावण को भरपेट खुराक मिल ही गई है, तो यह कायाकल्प किसकी मेहरबानी से हुआ है?
- व्यवस्था के दस सिरों पर सवाल
यह सिर्फ एक पुतले के छोटे या बड़े होने की बात नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था और बजट के इस्तेमाल पर एक तंज है। रावण के पुतले का कद तो बढ़ गया है, लेकिन अब जनता यह चाहती है कि रावण के दस सिरों को जलाने से पहले व्यवस्था के उन दस सवालों का दहन होना चाहिए, जो भ्रष्टाचार और लाचारी की पोल खोलते हैं।
खैर, इस बार रावण का कद तो ऊंचा हो गया है, उम्मीद यही की जानी चाहिए कि इसके साथ ही जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही का कद भी उतना ही ऊंचा उठेगा!

