विशाल विरोध प्रदर्शन: E20 (इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल) के खिलाफ सड़कों पर उतरे दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और AAP कार्यकर्ता
E20 पेट्रोल विरोध अभियान: पीएम आवास मार्च को पुलिस ने रोका
नई दिल्ली / शशि जायसवाल । इथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल (Ethanol-Blended E20 Petrol) के इस्तेमाल का विरोध करते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मंगलवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ दिल्ली की सड़कों पर उतर आए।
केजरीवाल पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और राज्यसभा सांसद संजय सिंह के साथ 23 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षरों वाली याचिका सौंपने प्रधानमंत्री आवास (7 लोक कल्याण मार्ग) की ओर बढ़ रहे थे। हालांकि, फिरोजशाह रोड पर पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद वे वहीं सड़क पर धरने पर बैठ गए। मौके पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और भारी पुलिस बल तैनात रहा।
"हम आतंकवादी नहीं हैं, अमेरिका से इथेनॉल खरीदना बंद करे सरकार": केजरीवाल
धरने के दौरान मीडिया को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर कड़ा हमला बोला।
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मुलाकात की मांग: केजरीवाल ने कहा, "हम आतंकवादी नहीं हैं। हम केवल E20 पेट्रोल के गंभीर मुद्दे पर देश के प्रधानमंत्री से मिलना चाहते हैं।"
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अंतरराष्ट्रीय दबाव का आरोप: उन्होंने आगे आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में नहीं आना चाहिए। अमेरिका से इथेनॉल खरीदना बंद किया जाना चाहिए और देश की जनता पर E20 पेट्रोल थोपना बंद होना चाहिए।
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जनता में भारी नाराजगी: केजरीवाल ने दावा किया कि पूरे देश में E20 पेट्रोल के कारण गाड़ियों के इंजन खराब होने और ईंधन की घटती दक्षता को लेकर जनता में गहरा असंतोष है।
'इथेनॉल टाउन हॉल' और 23 लाख हस्ताक्षरों का अभियान
AAP प्रमुख ने बताया कि इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी ने एक बड़ा जनअभियान शुरू किया है।
हाल ही में दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब (Constitution Club) में आयोजित 'इथेनॉल टाउन हॉल' कार्यक्रम में देशभर से लोग शामिल हुए थे। इसी राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत E20 पेट्रोल को वापस लेने की मांग को लेकर 23 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर जुटाए गए हैं।
केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पीएमओ (PMO) को पत्र लिखकर व्यक्तिगत रूप से मिलने का समय मांगा था, लेकिन अनुमति न मिलने के कारण पार्टी को 'पीएम आवास मार्च' का रास्ता चुनना पड़ा।

