ईश्वर की कृपा से ही सौभाग्यशालियों को होते हैं संत दर्शन: टुण्डपुरा गुरुमाया आश्रम पर संपन्न हुआ दशहरा उत्सव
हलैना (विष्णु मित्तल) गांव टुण्डपुरा स्थित श्री गुरुमाया आश्रम पर श्री गुरुमाया भक्त मण्डल एवं सिद्ध पुरुष स्वर्गीय रंगली भगत जी महाराज के शिष्यों के सानिध्य में चल रहे 71वें दशहरा उत्सव का समापन भव्यता के साथ हुआ। संत बालकदास महाराज एवं साधु बाबा के सानिध्य में आयोजित इस अनुष्ठान के तहत श्रीराम यज्ञ की पूर्णाहुति और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस दौरान आयोजित संत समागम में देश भर से आए हजारों संतों ने शिरकत की।
संतों के वचनों से गूंजा आश्रम, मानव सेवा ही सबसे बड़ी पूजा
संत समागम को संबोधित करते हुए संत बालकदास महाराज ने कहा कि ईश्वर की कृपा के बिना कोई भी कार्य संभव नहीं है। जिस पर प्रभु की विशेष कृपा होती है, उसी भाग्यशाली को संतों के दर्शन लाभ प्राप्त होते हैं। जहाँ संत का निवास होता है, वहीं प्रत्यक्ष रूप से ईश्वर का वास माना जाता है।
इस दौरान संत साधु बाबा, संतोष बाबा, पण्डा बाबा आदि ने अपने प्रवचनों में फरमाया कि संत एवं मानव सेवा ही दुनिया की सबसे बड़ी सेवा है। जो मनुष्य निःस्वार्थ भाव से सेवा कार्य करता है, उस पर हमेशा ईश्वर की असीम कृपा बनी रहती है।
विभिन्न धार्मिक स्थलों से पहुँचे संत और श्रद्धालु
आश्रम के सेवक परसराम पुजारी बाबा ने जानकारी दी कि 11 से 20 अक्टूबर तक चले इस 10 दिवसीय दशहरा उत्सव के दौरान रामायण पाठ, श्रीराम यज्ञ, कीर्तन, प्रवचन, संत दर्शन और संत समागम जैसे आध्यात्मिक कार्यक्रम हुए।
संत समागम में अयोध्या, चित्रकूट, पुष्कर, वृन्दावन, मथुरा, बनारस, उज्जैन, इंदौर आदि प्रमुख धार्मिक स्थलों से बड़ी संख्या में संत-महात्मा पधारे। वहीं भरतपुर, डीग, करौली, दौसा, अलवर, सवाई माधोपुर, धौलपुर, जयपुर, आगरा, मथुरा और टोंक आदि जिलों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
संत सम्मान और कंबल वितरण
उत्सव के अंतिम दिन मण्डल की ओर से पधारे हुए संत समाज का आदर-सत्कार किया गया तथा जरूरतमंद लोगों को कंबलों का वितरण किया गया, जिससे कार्यक्रम में सेवा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला।

