राजर्षि अभय समाज की 111वे वर्ष की रामलीला में लक्ष्मण शक्ति से हनुमान जी द्वारा संजीवनी बूटी लाने तक की लीलाओं का हुआ भव्य मंचन
अलवर (अनिल कुमार गुप्ता) श्री राजर्षि अभय समाज, अलवर के रंगमंच पर आयोजित 111वें वर्ष की ऐतिहासिक रामलीला के ग्यारहवें दिन लक्ष्मण मेघनाद संवाद, लक्ष्मण शक्ति, कालनेमी उद्धार, भरत हनुमान जी का मिलन, लक्ष्मण जी की प्राण रक्षा तक के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण एवं मनोहारी मंचन किया गया। लीला का शुभारंभ लक्ष्मण मेघनाद युद्ध के साथ हुआ, जिसमें मेघनाद द्वारा लक्ष्मण जी को ब्रह्म शक्ति द्वारा मूर्छित कर दिया गया।
लक्ष्मण जी के मूर्छित होने पर श्रीराम की करुणा और भ्रातप्रेम को देखकर दर्शक भी भावविभोर हो गए।सुषेन वैध द्वारा बताई गई संजीवनी बूटी लाने के लिए रामजी हनुमान जी से कहते हैं कि तुम्हारे बिना मेरे काज कौन बनाएगा।रावण के गुप्तचर सुख सारण रावण को बताते हैं कि हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने जा रहे हैं तो रावण कालनेमी को उन्हें रोकने के लिए भेजता है, हनुमान जी उसका उद्धार करते हैं। जब पर्वत पर पहुंचकर संजीवनी बूटी समझ में नहीं आती तो हनुमान जी पूरा पहाड़ उठा कर चल देते हैं।
भरत जी हनुमान जी मिलन में दर्शाया जाता है कि भरत जी को देखकर हनुमान जी अचंभित हो जाते हैं कि उनका स्वरूप भी बिल्कुल प्रभु श्रीराम जैसा ही है। फिर सारा वृत्तांत सुनकर भरत जी लक्ष्मण जी के भाग्य की प्रशंसा करते हैं।
उसके बाद प्रभु श्री राम की कृपा से हनुमान जी श्री गति शीघ्र संजीवनी बूटी पहुंच कर लक्ष्मण जी के प्राण की रक्षा करते हैं। पूरा वातावरण भक्तिमय होकर प्रभु श्री राम और हनुमान जी के जयकारों से गूंज उठा। संस्था की ओर से आयोजित यह 111वें वर्ष की रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के पारिवारिक महत्व, भ्रातृप्रेम, वात्सल्य और करुणा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

