पति -पत्नी के गहरे प्यार, अटूट विश्वास का प्रतीक करवा चौथ व्रत 29 अक्टूबर को
लक्ष्मणगढ़ (अलवर ) कमलेश जैन
हिंदू धर्म से जुड़ी विवाहित महिलाओं के लिए करवा चौथ का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। करवा चौथ का व्रत 29 अक्तूबर गुरुवार के दिन रखा जाएगा।
योग शिक्षक पंडित लोकेश कुमार ने बताया कि करवा चौथ पर्व पति-पत्नी के गहरे प्यार और अटूट विश्वास का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती है। और पति की लंबी आयु की कामना करती हैं।
क्षेत्र सहित राजस्थान में करवा चौथ का व्रत बेहद ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। संध्याकाल में विवाहित महिलाएं सोलह श्रृंगार कर खुद को सुंदर तरीके से सजाती हैं।
बिछुए, पायल, कांच की चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी और आलता भी लगाती हैं। इस पावन मौके पर महिलाएं अपने हाथों को मेहंदी से सजाती हैं, जिसे सौभाग्य और प्यार का प्रतीक माना जाता है। शाम होने के बाद ही करवा चौथ की रस्में चांद निकलने से ठीक पहले शुरू हो जाती हैं। सुहागिन महिलाएं पारंपरिक परिधान से सज-धजकर तैयारी रहती हैं। वे अपने पड़ोसी और रिश्तेदारों के साथ मिलकर पूजा में हिस्सा लेती हैं। और सच्चे मन से अपने पति की लंबी उम्र के लिए आशीर्वाद मांगती हैं। चंद्रमा निकलना इस त्योहार का सबसे प्रतीक्षित पल होता है।
करवा चौथ व्रतअपनी समृद्धि और गौरवशाली विरासत के लिए जाना जाता है। यहां उपखंड क्षेत्र में भी करवा चौथ पर्व मनाया जाता है, सुहागिन महिलाएं पारंपरिक राजस्थानी परिधान पहनती हैं और पूरे दिन पूजा-पाठ और सेवा के कार्यों में हिस्सा लेती हैं। यहां पर भी महिलाएं चांद दिखाई देने के बाद ही व्रत तोड़ती हैं।
सभी जगहों पर स्थानीय रीति-रिवाज, खान-पान और पहनावे के अंतर को छोड़कर करवा चौथ व्रत में बाकी सब कुछ एक जैसा ही है।

