तेरापंथ नगर में शिक्षक दिवस पर गुरु शिष्य के संबंध का अनूठा नजारा

Sep 6, 2021 - 02:48
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तेरापंथ नगर में शिक्षक दिवस पर गुरु शिष्य के संबंध का अनूठा नजारा

भीलवाड़ा  (राजस्थान/ बृजेश शर्मा) भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से गुरुकुल की परंपरा रही है। गुरु ही शिक्षक के रूप में सदा से शिक्षा देते रहे है। शिक्षक दिवस पर गुरू शिष्य के संबंध का अनूठा नजारा यहां तेरापंथ नगर में चातुर्मास कर रहे पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण के सान्निध्य में देखने को मिला। तेरापंथ धर्मसंघ के 11 वें अनुशास्ता आचार्य महाश्रमण की अनुशासना में 700 से अधिक साधु -साध्वी साधना के पथ पर आगे बढ़ रहे हैं वहीं अनेकों श्रावक श्राविकाएं धर्माचरण कर रही है। उन्हें शिक्षक के रूप में गुरु महाश्रमण निरंतर अध्यात्म का पथदर्शन करते रहते है। पर्युषण के द्वितीय दिन 'स्वाध्याय दिवस' पर आचार्य श्री ने स्वाध्याय की महत्ता बताते हुए कई बालमुनि-साध्वियों से स्वाध्याय-अध्ययन का लेखा जोखा लिया एवं और अध्ययन की प्रेरणा दी। आचार्यश्री को शिक्षक रूप देख हर कोई अभिभूत था।

भगवान महावीर की अध्यात्म यात्रा का वर्णन करते हुए गुरुदेव ने कहा- जैन लोकवाद के अनुसार हम जिस मनुष्य क्षेत्र में रहते हैं वह अढ़ाई द्वीप में जंबूद्वीप पर है। इसी जंबूद्वीप के महाविदेह क्षेत्र की जयंती नगरी में भगवान महावीर के जीव का नयसार भव में जन्म हुआ। एक बार नयसार जंगल में लकड़ियां काटने गया जहां उसे संत मिले जो रास्ता भटक गए थे। नयसार ने भक्ति पूर्वक अपने भोजन का उन संयमी संतों को दान दिया तत्पश्चात उन्हें सही मार्ग बताया। संतो ने भी उसे धर्म का प्रतिबोध देते हुए धर्माचरण की प्रेरणा दी। भगवान महावीर के जीव को नयसार के भव में सम्यक्त्व की प्राप्ति हुई। आचार्य प्रवर ने आगे कहा कि शुद्ध दान का बहुत महत्व होता है। साधु तो अकिंचन, त्यागीपुरुष होते हैं। गृहस्थ सोचे कि मैं किस प्रकार साधु-संतों की साधना में सहयोगी बन सकूं। अपने प्रासुक भोजन, वस्त्र, स्थान आदि के भक्तिपूर्वक दान की भावना श्रावक के मन में रहे। 
-अनंत जन्मों में जिस जन्म में सम्यक्त्व की प्राप्ति होती है वह बहुत बड़ी बात होती है। सम्यक्त्व से बड़ा कोई रत्न नहीं है। चारित्र के लिए भी सम्यक्त्व का होना जरूरी है। स्वाध्याय दिवस के संदर्भ में आचार्य प्रवर ने कहा स्वाध्याय संयम को सिंचन देने वाला अमृत है। स्वाध्याय करने से कितना नवीन ज्ञान हमें प्राप्त होता है। दिनचर्या में कुछ समय स्वाध्याय के लिए अवश्य लगाना चाहिए। हमारे बालमुनि-साध्वियां हैं यह धर्म संघ की नई पौध हैं। सब में अध्ययन की चेतना बढ़े। हमारा ज्ञान चारित्र को सिंचन देने वाला बने। इस अवसर पर मुख्यमुनि महावीर कुमार, साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा एवं मुख्यनियोजिका साध्वी विश्रुतविभा का सारगर्भित वक्तव्य हुआ। साध्वीवर्या संबुद्धयशा ने दिवस गीत का संगान किया।

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