बाघ परियोजना क्षेत्र में फैलता प्रदुषण वन व जीवों के लिए बड़ा खतरा

Aug 29, 2021 - 18:26
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बाघ परियोजना क्षेत्र में फैलता प्रदुषण वन व जीवों के लिए बड़ा खतरा

अलवर (राजस्थान)  राष्ट्रीय बाघ परियोजना क्षेत्र सरिस्का के कोर व बफर जोन में  बढ़ते मानव के दबाव, उसके द्वारा वन्य जीवों को डालें जा रहें  विविध प्रकार के पकवान , फल - फूल वन्यजीवों  के साथ-साथ वन विभाग के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। आम आदमी द्वारा डालें गये खाद्य पदार्थ वन्य जीव के शरीर पर प्रभाव डालने के साथ-साथ उन्हें मौत के घाट पहुंचाने में सहायक होनें लगें वहीं मानव द्वारा डाले गए खाद्य पदार्थों से वन्य जीव अपने जीवन चर्या को भूलकर मानव पर निर्भर होने लगा है। 
वन में स्वच्छंद विचरण करने वाले वन्य जीव अब चलकर गांव की ओर आगे बढ़ने लगा, जिससे गांव व शहरों में बढ़ते वन्यजीवों के दखलन से आम आदमी परेशान होने लगा है। वन क्षेत्र में पॉलिथीन की अत्यधिक मात्रा में फैलने से वन्य जीवों के लिए बड़ा खतरा उत्पन्न हो रहा है वहीं दूसरी तरफ वन विभाग के सिर दर्दी बढ़ने लगी है। 
करणी माता, सिलीसेढ़, बारा, तालवृक्ष, भर्तहरी, पांडुपोल, नलदेशर, नारायणी माता, निलकंठ, पाराशर, बांदीपुल जैसे छोटे बड़े सैकड़ों तीर्थ स्थल जो सरिस्का में आबाद होने के साथ ही धार्मिक आस्था के केन्द्र है।बाघ परियोजना क्षेत्र में आबाद सभी धार्मिक स्थलों पर प्रति दिन दस से पंद्रह किवंटल खाद्य पदार्थ, फल, फूल डाले जाते हैं। जिनके साथ प्रसाद व क्विंटलों पॉलिथीन भी डाली जाती रही, जिससे वन्य जीव खाद्य पदार्थ के साथ साथ पॉलिथीन भी खा रहे हैं, जो वन्य जीवों के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है।
 वन्य जीवों के लिए मानव निर्मित अप्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए वन विभाग के सामने एक चुनौती खड़ी है, एक तरफ वन्य जीव की सुरक्षा,  दूसरी  लोगों की धार्मिक आस्था। धार्मिक आस्था से वानरों व लंगुरों को खाद्य सामग्री डाली जाती , लेकिन उनके साथ सांभर, चीतल, सूअर, नीलगाय जैसे सभी जानवर रोड के किनारे , धार्मिक स्थलों पर खुले विचरण कर भोजन की तलाश करने लगे हैं, जो प्राणी अपना स्वयं का भोजन जंगल में विचरण कर स्वयं जुटाते रहा है,आज वह एक भिखारी की तरह सड़क किनारे भोजन प्राप्त करने की लालसा में डटा हुआ सहमा सा दिखाई देता है,जो एक विचारणीय विषय है।  सड़े गले खाद्य पदार्थ खाने से इन्हें फूड पोइजन जैसी बीमारियां होने लगी और  मौत के घाट उतार रही है । वन्य जीव भोजन की तलाश में वन क्षेत्र छोड़ कर मानव के पिछे दौड़ने लगता दिखाई देने लगा है, जो मानव द्वारा किए जा रहे कर्मों का प्रायश्चित है।
सरिस्का बाघ परियोजना क्षेत्र अलवर सहित  एन सी आर क्षेत्र में होने के साथ सम्पूर्ण राष्ट्र की एक अनमोल सम्पत्ति है। एल पी एस विकास संस्थान के निदेशक  प्रकृति प्रेमी राम भरोस मीणा ने चिंता जाहिर करते हुए कहां की सरिस्का पर्यावरणीय दृष्टि से एक विशेष पहचान रखने के साथ ही बाघ परियोजना क्षेत्र भी है जहां इस तरह से वन्य जीवों को खाद्य पदार्थ डालना गुनाह है, वन विभाग को इस तरह के पोल्यूशन से वन, वन्य जीव व वनस्पति को बचाने के लिए अपने कानून का स्तेमाल करना चाहिए, जिससे खाद्य पदार्थ के साथ फैलती पौलोथीन व मानव निर्मित अप्राकृतिक प्रदुषण से बचा जा सके।

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