खैरथल में फल एवं सब्जी मंडी यार्ड विकसित नहीं होने से व्यापारियों की बढ़ी मुसीबते

खैरथल में फल एवं सब्जी मंडी यार्ड विकसित नहीं होने से व्यापारियों की बढ़ी मुसीबते

खैरथल (अलवर, राजस्थान/ हीरालाल भूरानी)  अलवर जिले के प्रमुख कस्बे खैरथल में सब्जी एवं फल मंडी यार्ड विकसित करने में उदासीनता के चलते पुरानी मंडी के इर्द-गिर्द के रास्तों पर मुसीबतें बढ़ रही है। नया फल एवं सब्जी मंडी यार्ड विकसित करने के लिए विधायक दीपचंद खैरिया के प्रयास से नगरपालिका प्रशासन की ओर से क़ृषि उपज मंडी समिति खैरथल को पर्याप्त भूमि निशुल्क दे दिए जाने के बावजूद उदासीन रवैए के चलते अभी तक भी कोई प्रगति नहीं दिखाई दे रही है।
कस्बे के रेलवे स्टेशन व फाटक के समीप करीब 45 साल पहले नगरपालिका द्वारा जोहड़ को मिट्टी भर्त करवा कर सब्जी मंडी विकसित की गई थी जहां ग़ैर सब्जी फल व्यवसायियों के काफी संख्या में घुस जाने के परिणामस्वरूप थोक फल व्यापारियों को सब्जी मंडी के इर्द-गिर्द दुकानों किराये पर लेकर व्यापार करना पड़ रहा है।
आस पास के कस्बों व गांवों से फल सब्जी का क्रय-विक्रय करने आने वालोंं के बड़ी संख्या में छोटे बड़े, वाहनों, लोडिंग रिक्शाओं, दुपहिया वाहनों के खड़े रहने के साथ फल व्यापारियों द्वारा दुकान से बाहर बीस तीस फीट रोड़ पर सामान डिस्प्ले कर रखने के कारण किशनगढ़ रोड व रेलवे स्टेशन रोड और हेमू कालानी चौक पर वाहनों को घंटों जाम में फंसे रहने के बाद बमुश्किल अपने गंतव्य की ओर जाने की राह मिल पाती है।
इसी रोड़ पर ही कस्बे का एक मात्र रेलवे फाटक संख्या 93 जोकि रेलवे स्टेशन से सिर्फ 500 मीटर की दूरी पर स्थित है, पर भी हर समय वाहनों की चिल्ल-पों लगी रहती है।इस फाटक से जुड़े पांच रास्तों जयपुर रोड, हरसौली रोड़, लिंक रोड़, किशनगढ़ रोड, चालीस फुटा रोड भी जाम हो जाना सामान्य बात है। एक बार फाटक खुलने के बाद दूसरी ट्रेन के गुजरने के लिए फाटक को बंद करने में कई बार हालात इतने खराब हो जाते हैं कि आरपीएफ, जीआरपी और मुकामी थाना पुलिस के दर्जनों जवानों को भारी मशक्कत के बाद फाटक बन्द करवाने में सफलता हासिल होती है। इस दौरान द्रुतगामी रेलों तक को फाटक बंद होने और लाइन क्लियर मिलने की इंतजार में दोनों तरफ खड़े रहकर इंतजार करने की नौबत आ जाती है।
सब्जी मंडी के रेलवे ट्रैक समीप होने से आए दिन यहां आवारा पशुओं के ट्रेन की चपेट में आने की घटनाओं को भी सुरक्षा की दृष्टि से कम नहीं आंका जा सकता है। इतना कुछ होने के बावजूद प्रशासन इस विकट समस्या से निजात दिलाने के प्रति कतयी गंभीर दिखाई नहीं देना चिंता का विषय बना हुआ है।

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