पंचायत कालाडेरा में 14 बोरिंगों के भ्रष्टाचार के मामले में बड़ा खुलासा: जिला परिषद की जाँच रिपोर्ट में पूर्व सरपंच, तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी व तत्कालीन पंचायत समिति गोविन्दगढ के सहायक अभियंता को माना दोषी

जांच कमेटी ने 14 बोरिंग खुदाई करवाने के दौरान की राशि 45 लाख रुपए को निष्फल व्यय मानते हुए वसूली योग्य बताया है।

Oct 27, 2023 - 11:28
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पंचायत कालाडेरा में 14 बोरिंगों के भ्रष्टाचार के मामले में बड़ा खुलासा: जिला परिषद की जाँच रिपोर्ट में पूर्व सरपंच, तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी व तत्कालीन पंचायत समिति गोविन्दगढ के सहायक अभियंता को माना दोषी

जांच कमेटी ने 14 बोरिंग खुदाई करवाने के दौरान की राशि 45 लाख रुपए  को निष्फल व्यय मानते हुए वसूली योग्य बताया है। 

जांच रिपोर्ट मैं 14 बोरिंगो के भ्रष्टाचार में 45 लाख रुपए का भुगतान किया गया जो की पंचायत रोकड़ में दर्ज है जबकि रिकॉर्ड में माप पुस्तिका के अन्दर 53,50,917 रुपये दर्ज किया गया है। जबकि माप मूल्यांकन में यह राशि 31,02,152 रुपये आ रही है। बोरिंगो की माप मूल्यांकन में जांच टीम द्वारा 22,48,765 रुपये की भारी राशि का अंतर आ रहा है। जो की वसूली योग्य बताएं गए हैं। 

एक बोरिंग जो की मामले की जांच एवं भौतिक सत्यापन के समय मौके पर नहीं मिला था।खातियो के मोहल्ले में उक्त बोरिंग को जांच कमेटी द्वारा दोबारा जांच करने के बाद एवं स्थानीय ग्रामीण के बयान लिखित में लेने के बाद बोरिंग की राशि को गबन की श्रेणी में माना है। 

 इन सभी 14 बोरिंगो की भूमि संबंधित भौतिक सत्यापन विवादास्पद स्थिति में है इसके संबंध में कालाडेरा पटवारी व  तहसीलदार महोदय चौमूं द्वारा भी जांच कमेटी द्वारा रिपोर्ट मांगी गई थी जो आज तक नहीं दी गई है।


चौमूं  (जयपुर, राजस्थान / राजेश कुमार जांगिड़ कालाडेरा) चौमूं उपखण्ड की पंचायत समिति गोविन्दगढ की ग्राम पंचायत कालाडेरा में वर्ष 2019 में 14 बोरिंगों में हुए 45 लाख रुपए के भ्रष्टाचार के मामले में कालाडेरा ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच विष्णु नागर, तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी धनराज जोशी व तत्कालीन सहायक अभियंता ताराचंद जाटव तथा मै० श्याम ट्रेडर्स तत्कालीन संवेदक सभी को मिली भगत कर राजकोष को हानि पहुंचाने हेतु जिला परिषद की जिला स्तरीय कमेटी के द्वारा उत्तरदायी एवं दोषी माना है। और 45 लाख रुपए की राशि को निष्फल व्यय मानते हुए वसूली योग्य बताया है। गौरतलब है कि इस मामले में पंचायत समिति गोविन्दगढ के तत्कालीन विकास अधिकारी अनिल कुमार सोनी के द्वारा भी प्राथमिक स्तर पर जांच कर 14 बोरिंग के 45 लाख रुपए को जांच रिपोर्ट में निष्फल एवं वसूली योग्य बताते हुए इन सभी को दोषी माना था उसके बाद अनिल कुमार सोनी द्वारा इस मामले की जांच जिला स्तर से करवाने के लिए जिला परिषद जयपुर को लिखा गया था इसके बाद तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद जयपुर सुमन देवी द्वारा तीन सदस्य जांच कमेटी गठित कर मामले की जांच के लिए तत्कालीन अधिशासी अभियंता के. सी. मीणा  जिला परिषद जयपुर, नरेन्द्र कुमार यादव सहायक विकास अधिकारी जिला परिषद जयपुर, सागरमल सामोता सहायक लेखा अधिकारी द्वितीय पंचायत समिति झोटवाड़ा के द्वारा शिकायतकर्ता ग्रामीण व वर्तमान सरपंच ग्राम पंचायत कालाडेरा अशोक कुमार शर्मा एवं सहायक अभियंता पंचायत समिति गोविन्दगढ  महावीर प्रसाद चौधरी एवं ग्रामीणों की उपस्थिति में 26/03/2022 को 14 बोरिंगो का मौका निरीक्षण कर प्रकरण की जांच की गई। जांच रिपोर्ट में भ्रष्टाचारियों द्वारा सरकारी रिकॉर्ड में एवं 14 बोरिंगों के भौतिक सत्यापन एवं माप मूल्यांकन में गंभीर एवं भारी गड़बड़ियां मिलीं। जांच रिपोर्ट में 14 बोरिंगो के भ्रष्टाचार में 45 लाख रुपए का भुगतान किया गया जो की पंचायत रोकड़ में दर्ज है जबकि रिकॉर्ड में माप पुस्तिका के अंदर 53,50,917 रुपये दर्ज किया गया है। जबकि माप मूल्यांकन में यह राशि 31,02,152 रुपये आ रही है। बोरिंगो की माप मूल्यांकन में जांच टीम द्वारा 22,48,765 रुपये की भारी राशि का अंतर आ रहा है। जो की वसूली योग्य बताए गए हैं। और एक बोरिंग जो की मामले की जांच एवं भौतिक सत्यापन के समय मौके पर नहीं मिला था।

खातियो के मोहल्ले में उक्त बोरिंग को जांच कमेटी द्वारा दोबारा जांच करने के बाद एवं स्थानीय ग्रामीण के बयान लिखित में लेने के बाद बोरिंग की राशि को गबन की श्रेणी में माना है जो की एक गंभीर लापरवाही एवं बड़ा भ्रष्टाचार है । क्योंकि इन सभी 14 बोरिंगो की भूमि संबंधित भौतिक सत्यापन विवादास्पद स्थिति में है इसके संबंध में कालाडेरा पटवारी से भी एवं तहसीलदार महोदय चौमूं द्वारा भी जांच कमेटी द्वारा रिपोर्ट मांगी गई थी जो आज तक नहीं दी गई है।तत्कालीन सहायक अभियंता पंचायत समिति गोविन्दगढ ताराचंद जाटव द्वारा जांच कमेटी के समक्ष लिखित बयान में गंभीर आरोप लगाए हैं जिसमें उन्होंने 14 बोरिंग की तकनीकी स्वीकृति जारी करना बताया है लेकिन उन्हें बोरिंग कब कराए गए उसकी जानकारी नहीं है ना ही उनके द्वारा माप एवं भौतिक सत्यापन किया गया है। और नाही माप पुस्तिका में इंद्राज किया है। माप पुस्तिका में किए गए हस्ताक्षर को उन्होंने फर्जी एवं मोहर को भी फर्जी बताया है। तथा लिखित बयान में स्वीकार किया है और एफएसएल जांच की मांग की गई है की फर्जी हस्ताक्षर किसके द्वारा किए गए हैं इसकी जांच कराई जाए। इतनी बड़ी लापरवाही एवं छेड़छाड़ सरकारी दस्तावेज के साथ की गई है उसके बावजूद आज तक इन लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई यह गंभीर चूक का मामला है। और माप पुस्तिका में भी दिनांक रहित हस्ताक्षर किए गए हैं इन 14 बोरिंगो में ना ही तो विद्युत कनेक्शन किया गया है ना ही उनकी भूमि संबंधित कोई आकलन किया गया है जिस कारण उक्त 14 बोरिंग आम जनता की किसी लाभ के नहीं है यह जांच कमेटी द्वारा जांच रिपोर्ट में बताया गया है। और तीन सिंगल फेस बोरिंग की निर्माण की तकनीकी स्वीकृति जारी करने से पूर्व ही वित्तीय स्वीकृति जारी की गई जो कि ग्रामीण कार्य निर्देशिका 2010 के नियमों के विपरीत है। जिला परिषद जयपुर के तत्कालीन सीईओ जसमीत सिंह संधू(IAS)के द्वारा धनराज जोशी तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी कालाडेरा एवं तत्कालीन पंचायत समिति गोविन्दगढ के सहायक अभियंता ताराचंद जाटव को 16 सीसी का नोटिस एवं आरोप पत्र दिया गया है और तत्कालीन सरपंच कालाडेरा विष्णु नागर के विरुद्ध  राजस्थान पंचायती राज नियम की धारा 38 के तहत जिला स्तरीय कमेटी द्वारा जांच रिपोर्ट की प्रति संलग्न कर कार्रवाई के लिए सक्षम स्तर पर भिजवाना सुनिश्चित किया गया है ।जांच कमेटी द्वारा सभी पक्षों के बयान एवं रिकॉर्ड की जांच के बाद 45 लाख रुपए का भुगतान निष्फल बताते हुए वसूली योग्य बताया है एवं पंचायती राज विभाग के परिपत्र दिनांक 17/09/2014 के अनुसार राज्य निधि से किया गया है जो सरकार के माप के अनुसार सरकार के विरुद्ध दायित्व उत्पन्न करने वाली है इसलिए कालाडेरा के तत्कालीन सरपंच विष्णु नागर , तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी श्री धनराज जोशी एवं तत्कालीन सहायक अभियंता ताराचंद जाटव तथा मैं० श्याम ट्रेडर्स तत्कालीन संवेदक सभी को मिली भगत कर राजकोष को हानि पहुंचाने हेतु उत्तरदायी माना है। और कानूनी अधिकार प्राप्त एजेंसी से सेवानियमों में विहित प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई हेतु प्रशासनिक स्तर से किया जाना प्रस्तावित बताया है। 
मामले को लेकर जिला परिषद जयपुर मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ शिल्पा सिंह( IAS )से दूरभाष पर जानकारी चाहिए तो उन्होंने कहा कि मामला मेरी जानकारी में नहीं है। मैं मामले की जानकारी करती हूँ।

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