विद्युत कटौती से परेशान किसानों ने उपखण्ड अधिकारी को ज्ञापन सौंप आंदोलन की दी चेतावनी

रामगढ़ ,अलवर (राधेश्याम गेरा)
बार बार होने वाली विद्युत कटौती से परेशान क्षेत्र चढूनी यूनियन के किसानों ने उपखण्ड अधिकारी को ज्ञापन सौंप आंदोलन की दी चेतावनी।
रामगढ़ उपखण्ड क्षेत्र की नगरपालिकाओं को छोड़ ग्रामीण क्षेत्र में एलडी के नाम पर होने वाली बार बार विद्युत कटौती से परेशान क्षेत्र के लोगों ने चढूनी किसान यूनियन के जिला पदाधिकारियों के नेतृत्व में सहायक अभियंता कार्यालय पर ज्ञापन देने पंहुचे।वंहा ना तो सहायक अभियंता और ना ही कनिष्ठ अभियंता कार्यालय में मिले। उनके ना मिलने पर सभी लोग उपखण्ड अधिकारी कार्यालय पंहुच और उपखण्ड अधिकारी नीतू करोल को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन देने आए कस्बा अलावडा़ के सरपंच जुम्मा खान ने बताया कि बार बार होने वाली विद्युत कटौती से सबसे अधिक परेशानी नवजात बच्चों और वृद्ध लोगों को उठानी पड़ रही है एलडी के नाम पर चार चार घंटे विद्युत कटौती की जा रही है।
साथ ही कस्बा अलावडा़ के पूर्व सरपंच कमल चंद ने बताया कि विद्युत कटौती का अभी से यह हाल है जबकि वर्तमान में बरसात का मौसम होने के चलते फसलों में सिंचाई बंद पड़ी है। इसका मतलब यह है कि जब सिंचाई का सीजन आएगा तो विद्युत सप्लाई पूरी तरह चौपट हो जाएगी। और बताया कि दोनों ही पार्टियों के नेताओं ने चुनाव के समय क्षेत्र की विद्युत पानी मुख्य समस्या के समाधान का वायदा किया था और चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
चढूनी किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष विरेन्द्र मोर ने उपखण्ड अधिकारी को ज्ञापन के जरिए चेतावनी दी है कि यदि पांच दिवस में विद्युत सप्लाई व्यवस्था सुचारू नहीं हुई तो मजबूरन हमें सड़कों पर उतर उग्र आंदोलन करना पड़ेगा।जिसकी जिम्मेदारी विद्युत विभाग और प्रशासन की होगी। साथ ही कहा कि हमें बेवजह कोई शौक नहीं है जो हम आंदोलन करें लेकिन विद्युत विभाग की लापरवाही या मनमर्जी से क्षेत्र के लोगों को परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है इसलिए यदि पांच दिवस में समाधान नहीं हुआ तो हमें उग्र आंदोलन करना पड़ेगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान चढूनी किसान यूनियन जिला अध्यक्ष विरेन्द्र मोर,उप जिला अध्यक्ष समाज सेवी ताहिर भाई, पूर्व सरपंच कमल चंद, सरपंच जुम्मा खान,सद्दाम खान ,मौसम खां, आसीन खां,सुमेर खान, गगन दीप,अवतार सिंह, गुरनाम सिंह सहित अनेक ग्रामीण मौजूद रहे।






