स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में दे योगदान-कानावत

स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में दे योगदान-कानावत

भीलवाड़ा (राजस्थान/ बृजेश शर्मा) 

 


भीलवाड़ा अधिवक्ता परिषद द्वारा स्वामी विवेकानंद जी की जयंती अधिवक्ता परिषद अध्यक्ष रघुनंदन सिंह कानावत की अध्यक्षता में महेश स्कूल में कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए मनाई। अधिवक्ता परिषद मीडिया प्रभारी पीरू सिंह गौड़ ने बताया कि सर्वप्रथम सभी अधिवक्ताओ ने स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर,दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इसके पश्चात सभी अधिवक्ताओ का अधिवक्ता परिषद  ने तिलक लगाकर स्वागत किया गया।
मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ भीलवाड़ा के प्रचार प्रमुख दीपक सेन, सुरेश सुवालका, जिला अभिभाषक संस्था भीलवाड़ा के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र कचोलिया द्वारा स्वामी विवेकानंद जी के आदर्शों के बारे में उपस्थित अधिवक्ताओ को विस्तार से पाथेय प्रदान किया।
अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष रघुनंदन सिंह कानावत ने बताया कि युवाओ को स्वामी विवेकानंद जी के आदर्शों को अपने जीवन मे उतारने व उन विचारों को व्यवहार में लाने के लिये प्रेरित किया। स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे।
मुख्य वक्ता दीपक सेन ने पाथेय प्रदान करते हुए बताया कि स्वामी विवेकानंद वेदांत के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। उनका वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में सन् 1893 में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वेदांत (वेदान्त) दर्शन अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में स्वामी विवेकानन्द की वक्तृता के कारण ही पहुँचा। उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी जो आज भी अपना काम कर रहा है। वे रामकृष्ण परमहंस के सुयोग्य शिष्य थे। उन्हें 2 मिनट का समय दिया गया था लेकिन उन्हें प्रमुख रूप से उनके भाषण की शुरुआत "मेरे अमेरिकी बहनों एवं भाइयों" के साथ करने के लिये जाना जाता है। उनके संबोधन के इस प्रथम वाक्य ने सबका दिल जीत लिया था। विवेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस की मृत्यु के बाद विवेकानंद ने बड़े पैमाने पर भारतीय उपमहाद्वीप का दौरा किया और ब्रिटिश भारत में मौजूदा स्थितियों का प्रत्यक्ष ज्ञान हासिल किया। बाद में विश्व धर्म संसद 1893 में भारत का प्रतिनिधित्व करने, संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए प्रस्थान किया। विवेकानंद ने संयुक्त राज्य अमेरिका, इंग्लैंड और यूरोप में हिंदू दर्शन के सिद्धांतों का प्रसार किया और कई सार्वजनिक और निजी व्याख्यानों का आयोजन किया। भारत में विवेकानंद को एक देशभक्त सन्यासी के रूप में माना जाता है और उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
राजेन्द्र कचोलिया ने बताया कि स्वामी विवेकानंद जी के जीवन के बारे में बताते हुए कहा कि उन्होंने युवाओं को प्रेरित करने के लिए 'उठो, जागो और तब तक प्रयास करो, जब तक कि अपने लक्ष्य तक न पहुँच जाओ।' का नारा दिया। कार्यक्रम के अंत मे अधिवक्ता परिषद अध्यक्ष रघुनंदन सिंह कानावत ने उपस्थित अधिवक्ताओ का धन्यवाद ज्ञापित किया।
मंच संचालन परिषद महासचिव राजेश सामरिया ने किया। कार्यक्रम में कोषाध्यक्ष अदित्यनारायण जाजपुरा, राजकुमार शर्मा, कैलाशचंद्र टेलर, राघवेंद्रनाथ व्यास, राकेश जैन, विजय सोनी, दीपक कोठारी, अनुराग आडोत, दीपेश जैन, निक्की अरोड़ा सहित  अधिवक्ताओ ने इस कार्यक्रम में शामिल होकर युवा दिवस मनाया गया।