बेखौफ चल रहा अवैध प्लाटिंग का कारोबार, नहीं थम रहा सिलसिला-90A नोटिस के बाद एक पर भी कार्रवाई नहीं

Mar 16, 2024 - 15:10
Mar 16, 2024 - 15:15
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बेखौफ चल रहा अवैध प्लाटिंग का कारोबार, नहीं थम रहा सिलसिला-90A नोटिस के बाद एक पर भी कार्रवाई नहीं

गोविंदगढ़,अलवर 
गोविंदगढ़ तहसील क्षेत्र मे सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वालो के लिए बना कानून ऐसे अतिक्रमियो  के लिए संजीवनी साबित हो  रहा है क्योंकि  नोकरशाही कानून के उसी हिस्से की पालना कर रहे हैं जिसमें 91 का नोटिस देकर बेदखली का आदेश जारी किया जाता है। यही हाल अवैध प्लाटिंग यानी  बिना कनवर्ज़न के जमीन पर प्लाटिंग करने वालो का है जहां हल्का पटवारी के द्वारा 90 Aकी कार्यवाही कर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है ओर  सारे प्रकरणों पर विभाग की ओर से नोटिस जारी किए गए पर कोर्ट में परिवाद दायर नहीं हुआ। विगत वर्षो के अंदर रजिस्ट्री कार्यालयों में छोटे प्लाटों की रजिस्ट्री की समीक्षा की जाए तो अवैध प्लाटिंग का खुलासा हो जाएगा। भू राजस्व अधिनियम के अंतर्गत जुर्माने के साथ रजिस्ट्री शून्य करने का प्रावधान है। गोविंदगढ़  सहित आसपास के क्षेत्र में इन दिनों अवैध प्लाटिंग जमकर हो रही है जिसे रोकने तहसील एवं ग्राम पंचायत  के अधिकारी कोई ठोस कदम नही उठा रहे हैं। बल्कि भूमाफियाओ के द्वारा अवैध प्लॉट खरीद कर आवास बनाने वालों को  रोड सहित अन्य सुविधाएं भी दी जा रही है। अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई नहीं होने से भू माफिया मालामाल हो रहे हैं। अब इस मामले को लेकर एक प्रतिनिधि मंडल मुख्यमंत्री से भेंटकर यहां हो रहे अवैध प्लाटिंग एवं सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के दस्तावेजों को सौपेगा।

अवैध प्लाटिंग की सूची में बिल्डर गायब, किसान फंसे

अवैध प्लाटिंग यानी  बिना कनवर्ज़न के जमीन पर प्लाटिंग गोविंदगढ़ तहसील क्षेत्र के गोविंदगढ़ ,रामबास ,खरसनकी पंचायत के मस्तपुर क्षेत्र मे की जा रही है ओर संबन्धित हल्का पटवारी के द्वारा  90A की कार्यवाही भी की है  सूची को देखने से मालूम पड़ता है कि इसमें रसूखदार भूमाफियाओं की बजाय उनके दलाल और सर्वाधिक किसानों के नाम हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि सारे भूमाफिया और बिल्डर कायदे से चल रहे हैं। एक भूमाफिया ने नाम न छापने की शर्त पर खुलासा किया कि वह लोग किसानों से सीधे सौदा कर टुकड़ों में प्लाट की रजिस्ट्री कराते हैं। इसका फायदा यह रहता है कि बिघा के भाव में खरीदी गई जमीन की वह कई गुना दर पर वर्गफुट में बिक्री करने में सफल रहते हैं और उनकी संलग्नता भी नजर नहीं आती।  प्लाटिंग करने वाले कोई और रजिस्ट्री करने वाले कोई और अवैध प्लाट का धंधा करने वाले बड़े चालाक है सबसे पहले वे जमीन मालिक से कुछ रकम देकर एग्रीमेंट कर लेते हैं  एक निश्चित समय और सीमा में ग्राहकों की खोज कर सीधे जमीन मालिक से छोटे-छोटे टुकड़े में रजिस्ट्री कराते हैं जिसमें दलालों का नाम कहीं नहीं रहता और वे कार्रवाई से बच जाते हैं। भूमाफिया किसानों से आने पौने दाम पर जमीन लेकर तीन से चार गुना दाम पर बेचते हैं। जमीन दलालों के द्वारा लोगों को झांसा दिया जाता है कि जहां वे प्लॉट बेच रहे हैं वहां सीसी रोड, नाली, पानी, बिजली सबकी व्यवस्था रहेगी, लेकिन ऐसा होता नहीं है। फिर जमीन खरीदकर मकान बनाने वाले नगरपालिका या ग्राम पंचायत  का चक्कर लगाते हैं और फिर वोटो की चाह मे  बकायदा सड़क भी बना दिया जाती  है। अवैध प्लाटिंग में घर बनने के बाद सरकार  को ही लोग दोष देने लगते हैं। क्षेत्र  में पिछले कई  वर्षों से अवैध प्लाटिंग हो रही है लेकिन किसी भी अधिकारी के द्वारा इन जमीन दलालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती है जिससे इनके हौसले बुलंद हैं।

अवैध प्लाटिंग की जानकारी के बावजूद रजिस्ट्री

अवैध प्लाटिंग के मामले में जैसे ही हल्का पटवारी को जानकारी मिलती है तो हल्का पटवारी उस भूमि पर 90 A की कार्यवाही कर तहसीलदार को रिपोर्ट सोप देता है ओर  इसकी जानकारी रजिस्ट्री विभाग को भेज देते हैं लेकिन रजिस्ट्री कार्यालय में मिलीभगत के चलते धड़ल्ले से रजिस्ट्री होती है। रजिस्ट्रार कार्यालय के मातहत सूची देखने या मिलान करने की कोशिश नहीं करते। ओर जिस भूमि पर विभाग ने 90 A की कार्यवाही का नोटिस जारी किया हुआ होता है उस भूमि की  रजिस्ट्री कर दी जाती है। यही नहीं 90 A की कार्यवाही के बाद भी भवन निर्माण , सड़क निर्माण भी हो जाते है । 

छले जाते हैं क्रेता

अवैध प्लाट के कारोबार में लगे लोगों द्वारा प्लाट विक्रय करने के लिए मुलभूत सुविधाओं की बात ही नहीं करते हैं सिर्फ मुख्य मार्ग से प्लाट तक पहुंच मार्ग बना दिया जाता है। शेष मुलभूत कार्य नहीं किया जाता है जिसके कारण वहां प्लाट लेकर रहने वाले लोगों के लिए समस्या शुरू होती है। ओर वह  शिकायत नहीं कर पाते है  चूंकि जिस जगह में क्रेता प्लाट लेते हैं उक्त कालोनी का न तो कोई एप्रुवल होता है न ही कालोनी विकास अनुज्ञा ली गई होती है जिसके कारण वहां के निवासी संबंधित की शिकायत भी नहीं कर पाते हैं।

RTI कार्यकर्ता अमित खेड़ापति के अनुसार नगरपालिका गोविंदगढ़ मे पूर्व की ग्राम पंचायत के नाम जो भी भूमि थी वह गैर आबादी क्षेत्र मे थी वहाँ पर पट्टा जारी नहीं हो सकते थे लेकिन ग्राम पंचायत की शह पर भूमाफियाओ ने सभी भूमि पर कब्जा कर उसे बेच दिया अब प्रशासन स्वयं अपनी भूमि को कब्जे से मुक्त करने मे असहाय नजर आ रहा है यही हाल रामबास ग्रामपंचायत का है जहां अगस्त 2022 मे ग्राम पंचायत की गैर मुमकिन बगीची खसरा नंबर 625 की किस्म बदलवाने के लिए तहसीलदार गोविंदगढ़ को आवेदन किया लेकिन वहाँ से जवाब आया की किस्म बदलने की आवश्यकता नहीं है ओर अराजी 625 हेतु पाहुच मार्ग भी ग्राम पंचायत रामबास के खसरा नंबर 2223 /612  मे से होकर जाता है जो की आम रास्ता अराजी से लगता हुआ है लेकिन ग्राम पंचायत रामबास ने भूमाफियाओ को कब्जा करने की शह देते हुए  गैर मुमकिन बगीची खसरा नंबर 625 से चोड़ा मार्ग ही निकाल दिया । जिसकी शिकायत उपखंड स्तरीय जनसुनवाई ,जिला स्तरीय जनसुनवाई मे भी की जा चुकी है ।

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