राजेंद्र शर्मा के आत्महत्या मामले की मुख्य आरोपी सुनीता कटारिया पर कसा शिकंजा: उचित अन्वेषण के लिए नई टीम गठित करने हेतु उच्च न्यायालय ने दिए निर्देश

राजेंद्र शर्मा के आत्महत्या मामले की मुख्य आरोपी सुनीता कटारिया पर कसा शिकंजा: उचित अन्वेषण के लिए नई टीम गठित करने हेतु उच्च न्यायालय ने दिए निर्देश

भीलवाड़ा (राजस्थान) भीलवाड़ा शहर के गुलाबपुरा क्षेत्र में पंखे से लटक कर फांसी देकर जान देने वाले राजेंद्र शर्मा के आत्महत्या के मामले में सुसाइड नोट में नामजद मुख्य आरोपी सुनीता कटारिया की मुश्किलें और बढ़ती जा रही है l राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधिपती श्री फ़रज़ंद अली ने दिनांक 16.11.2022 को राजेंद्र आत्महत्या के मामले में पुलिस अधीक्षक भीलवाड़ा को अन्वेषण के लिए एक नई टीम बनाने के निर्देश जारी किए हैं
जिसमें डीवाईएसपी के पद से नीचे का पुलिस अधिकारी नहीं होगा और मामले के अन्वेषण अधिकारी को निष्पक्ष जांच करने और अन्वेषण के परिणाम को यथाशीघ्र पेश करने के संबंध में निर्देश जारी किए हैंl साथ ही पीड़िता द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली अभ्यावेदन याचिका पर विचार करते हुए अन्वेषण एजेंसी से 2 माह के भीतर निष्कर्ष पर पहुंचने की उम्मीद जताते हुए पुलिस अधीक्षक भीलवाड़ा को सख्त निर्देश जारी किए गए हैंl उचित अन्वेषण बाबत जारी किए गए दिशा-निर्देशों का यह कोई पहला मामला नहीं रहा हैl
गौरतलब है कि पूर्व में भी इसी मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा सख्त दिशानिर्देश जारी किए गए थे, लेकिन अफसोस जारी किए गए दिशा निर्देशों की पालना नहीं होने पर राजेंद्र की पत्नी पीड़िता पायल दाधीच द्वारा उचित अन्वेषण के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय के समक्ष अपने अधिवक्ता नमन मोहनोत द्वारा प्रस्तुत दूसरी याचिका में दोबारा उच्च न्यायालय को दिशा निर्देश जारी करने के लिए विवश होना पड़ा है, ताकि मामले में उचित एवं निष्पक्ष अनुसंधान किया जा सकेl इस मामले में पुलिस की खामोशी के कारण पिछले लंबे समय से मामला अब और तूल पकड़ता जा रहा है,
वहीं दूसरी तरफ आरोपी सुनीता कटारिया पर भी शिकंजा कसता जा रहा हैl सुसाइड नोट में आत्महत्या करने वाले राजेंद्र ने सुनीता कटारिया को नामजद करते हुए तंग व परेशान करने के आरोप लगाए हैं हालांकि मामले में लिप्त आरोपी सुनीता कटारिया को बचाने में जुटी पुलिस सुनीता कटारिया पर लगे आरोपों को नजरअंदाज करने में लगी हुई हैl राजेंद्र के सुसाइड नोट में दर्ज आरोपों को सिरे से खारिज कर देना आसान नहीं हैl अगर पुलिस ने इमानदारी से तफ्तीश पूरी करके मामला कोर्ट में दाखिल कर दिया तो यह तफ्तीश कोर्ट में आरोपी सुनीता कटारिया के गले की घंटी बन सकती हैl उच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर जो इस मामले में निर्देश जारी किए गए हैं उनकी पालना करना पुलिस का कर्तव्य है, लेकिन प्रायः यह देखने में आता रहा है कि पुलिस बिना अवमानना याचिका के आदेश की पालना करने में गुरेज करती  है, उच्च न्यायालय उचित अन्वेषण में जो आदेश दिए जाते हैं उनमें से अपवाद स्वरूप ही आदेश होंगे जिनकी पालना हुई है, जब तक कि आदेश की अवमानना का नोटिस जारी नहीं होता तब तक पुलिस द्वारा आसानी से आदेश को क्रियान्वित नहीं किया जाता हैl न्याय के लिहाज से इस स्थिति को कभी भी अच्छा नहीं कहा जा सकताl उच्च न्यायालय द्वारा जारी किए गए पूर्व में दिशा निर्देशों की पालना नहीं करना और टालमटोली करना बेहद गंभीर हैl ऐसे में पीड़िता पायल द्वारा राजस्थान उच्च न्यायालय के समक्ष मामले में उचित अन्वेषण के संबंध में दूसरी याचिका पेश की गई है, जिसमें पुलिस अधीक्षक भीलवाड़ा को नई टीम गठित कर उचित अन्वेषण करने के संबंध में निर्देश जारी किए हैंl
सुसाइड करने वाले राजेंद्र के सुसाइड नोट इस बात की भी तस्दीक करने के लिए काफी है कि आरोपी सुनीता कटारिया और रवि खटीक उर्फ डेविड राजेंद्र और उसके परिवार को खत्म कर देना चाहते थे जिनके जाल में वह पूरी तरह फस चुका था, जिसने अपने परिवार की रक्षा करने एवं न्याय दिलाने की सुसाइड नोट में गुहार कीl घटना के बाद से ही आरोपी सुनीता कटारिया के संबंध में पुलिस ने कोई विशेष अनुसंधान नहीं कर उसे बचाने का प्रयास किया है और पुलिस की चुप्पी तमाम सवालों को खड़ा करने के लिए अपने आप में काफी हैlउधर पीड़ित परिवार का कहना है कि सुनीता कटारिया एक अधिवक्ता है और काफी बड़ी राजनैतिक पार्टी से संबंध रखती है जो काफी प्रभावशाली महिला हैl लिहाजा ऐसे में पुलिस आरोपी सुनीता कटारिया को बचाने में जुटी हुई हैl

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