देव बनियों के साथ खोई हुई वन संपदा को पुनः तैयार करना जरूरी- मीणा

ग्रामीण बनियों देव बनियों को बढ़ावा दिया जाए। पैंथरों की सुरक्षा के लिए सामाजिक वानिकी क्षैत्रों में जंगल किए जाएं खड़े

Dec 11, 2021 - 21:20
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देव बनियों के साथ खोई हुई वन संपदा को पुनः तैयार करना जरूरी- मीणा
  • वन्य जीवों को मानवीय दखलनों से बचाया जाए, 
  • वन क्षेत्र से जुली फलोरा (बिलायती किकर) को हटाया जाए।

अलवर (राजस्थान/योगेंद्र द्विवेदी) सरिस्का बाघ परियोजना मैं बढ़ते बाघों के कुनबे से एक तरफ खुशी की लहर फैली हुई है वहीं दूसरी तरफ सरिस्का के चारों ओर बढ़ते मानवीय दबाव के वास्ते यहां के वन्यजीवों का जीना दुर्लभ होता जा रहा है, वन्यजीवों को डाले जा रहीं खाद्य सामग्री से इन्हें आत्मनिर्भरता से दूर कर भिखारी बना रहे जिससे वन्य जीवों की प्रकृति, प्रवृत्ति के साथ स्वतंत्र जीवन जीने की अपनी शक्ति नष्ट होते दिखाई पड़ने के साथ ही एक छेड़छाड़ है। वन्य जीव केवल मनोरंजन के साधन बनकर रह जाएं या उन्हें मनोरंजन का साधन बना लिया जाए यह बहुत बड़ी भूल है।
 वन क्षेत्र में मानव का बढ़ता दबाव वन्यजीवों की सुरक्षा पर प्रश्न बनाता वहीं पर्यावरण प्रदूषण, प्लास्टिक कचरा, परिवहन के संसाधनों का तेज गति से दौड़ना उनके जीवन  के लिए संकट खड़ा करता है वहीं बाघों के कुनबे व युवा बाघों का अपना टैरिटेरी क्षैत्र बनानें से पैंथरों को जंगल में रुकना बड़ा मुश्किल होने के साथ ही चिंताजनक रहता है जिससे पैंथर अपना आवासीय क्षेत्र छोड़ कर बहार निकलने लगता है जो आज सरिस्का में देखा जा रहा है। यहां पैंथरों की संख्या पुर्व में दो सो के लगभग बताई जाती रही जो आज अविश्वसनीय लगती हैं।
बाघों के बढ़ते कुनबे के साथ ही पैंथरों की सुरक्षा भी हमारी नैतिक जिम्मेदारी हमें स्वीकार लेनीं चाहिए जिससे आये दिन अनावश्यक रूप से हों रही मोतों से बचाया जा सके। एलपीएस विकास संस्थान के प्रकृति प्रेमी व पर्यावरणविद राम भरोस मीणा ने कहा की पैंथर,चितल, सांभर,सुअर, सियार, आईना, जैसे अनेक प्रकार के वन्य जीव अभयारण्य क्षेत्र से बाहर निकल कर आबादी क्षेत्रों में आ रहें हैं जहां इनका सुरक्षित रहना नामुमकिन है। ऐसी स्थिति में इन्हें बचाने के लिए ग्रामीण वन क्षेत्रों, देव बनियों, अरण्य, नदी व पहाड़ी क्षेत्रों को पुनः तैयार करना होगा जिससे इन्हें बचाया जा सके।

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