पथैना में 17 अप्रैल से 312 वां धीरज बाबा का मेला, 18 अप्रैल को राष्ट्रीय कुश्ती दंगल
आस्था का केन्द्र है पथैना का धीरज बाबा: हलैना से जा कर ठाकुर सार्दुल सिंह ने बसाया था पथैना

वैर, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) भरतपुर रियासत के संस्थापक महाराजा सूरजमल के परिजन तथा हलैना जागीदार के ठाकुर अतिराम सिंह के पुत्र बड़े सार्दुल सिंह ने 1711 में हलैना से जाकर गांव पथैना की स्थापना की। स्थापना के बाद इस गांव की पहली मृत्यु ठाकुर धीरजसिंह की हुई,जो ठा.सार्दुल सिंह के पुत्र थे और ये 14 भाई थे। धीरज सिंह ने लोकदेवता व भूमिया बाबा का स्थान प्राप्त किया। जिनकी गांव में छत्तरी बनी हुई है, आस्था का केन्द्र है। ठा.सार्दुलसिंह के वंशज व गांव के लोगो की धीरज बाबा के प्रति भरपूर आस्था है। धीरज बाबा की यादगार में साल में एक बार मेला लगता है,मेला के तहत धीरज बाबा की शोभायात्रा,ध्वज पूजन,हवन,गोठ गायन,खेलकूद, पुरूष,घोडा-घोडी,ऊंट.ऊंटनी,साईकिल दौड,कुश्ती दंगल नौंटकी, भजन-जिकडी दंगल,सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि कार्यक्रम होते है।
जिनका लोग दिल खोल कर दो दिन तक आनन्द लेते हैं। साथ ही धीरज बाबा की पूजा अर्चना कर परिवार व देश की खुशहाली की कामनाएं करते हैं। इस बार मेला 17 अप्रैल से शुरू होगा और जो 18 अप्रैल तक लगेगा। मेला की तैयारियों में गांव का सर्व समाज जुट गया है और मेला कमेटी का गठन वास्ते गांव की सर्व समाज की पंचायत हुई। जिसमें कमेटी का अध्यक्ष व सचिव सहित अन्य पदाधिकारी चुनें गए। सर्वसम्मति से भगवान सिंह सूबेदार को मेला कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
धीरज बाबा मेला कार्यक्रम - श्री धीरज बाबा मेला कमेटी,ग्राम पंचायत व गांव के लोगों की ओर से गांव पथैना में 17 अप्रैल से दो दिवसीय श्री धीरज बाबा मेला लगेगा,जो मेला 18 अप्रेल तक लगेगा। इस बार श्री धीरज बाबा मेला के शुरु होने से एक दिन पूर्व 16 अप्रैल को गांव के संस्थापक सार्दुलसिंह बाबा कि कलश यात्रा निकाली जाएगी। 17 अप्रैल को सुबह 8ः15 बजे सार्दुल चौक स्थित श्री बिहारी जी महाराज मन्दिर पर ठाकुर जी की पूजा-अर्चना, 9ः15 बजे धीरज बाबा शोभायात्रा ,11ः15 बजे धीरज बाबा की पूजा- अर्चना,हवन,गोठ गायन,12ः00 बजे खेलकूद प्रतियोगिता व पुरूष, घोडा-घोडी,ऊंट.ऊंटनी,साईकिल दौड आदि कार्यक्रम एव रात्रि को सांस्कृतिक कार्यक्रम, 18 अप्रैल को ठाकुर सार्दुल बाबा स्टेडियम पर सुबह 11ः00 बजे से दोपहर 1ः 00 बजे तक जुनियर वर्ग तथा दोपहर 2ः30 बजे से देर सायं तक राष्ट्रीय कुश्ती दंगल,रात्रि को सांस्कृतिक कार्यक्रम,19 अप्रैल को सुबह 6 बजे मेला का समापन होगा।
- कट्टर विदेशी मुस्लिम विरोधी थे धीरज बाबा - हलैना के संस्थापक ठाकुर अतिरामसिंह के पुत्र ठाकुर सार्दुलसिंह के पुत्र धीरजसिंह नारी सशक्तिकरण के पक्षधर एवं नशा के विरोधी थे। स्वयं चरित्रवान,योद्वा थे। जिनकी वीरता वं चरित्रवान की आज भी गांव के लोग चर्चाएं करते है। ये बचपन से ही पहलवानी के शौकीन थे और पराई नारी की छाया से हमेशा दूर रहे। महाराजा जवाहर सिंह के परम सखा रहे और कट्टर विदेशी मुस्लिम विरोधी एवं हिन्दुत्व की भावना वाले थे। जो पराई महिला एवं मुगल शासकों की शक्ल तक देखना पसन्द नही करते, जिन्हे देख नफरत करते और मातृ भूमि से लगाव शिक्षा, वीरता,पहलवानी,कृषि आदि के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए। बाल विवाह,सती प्रथा,जीव हत्या के विरोधी एवं पर्यावरण के प्रेमी थे। करीब 300 साल पहले कुंवर जवाहरसिंह की शादी में शामिल होने गए। जहां कमर कलेवा के समय महिलाओं ने धीरज सिंह के हल्दी लगाने के प्रयास किए,जो महिलाओं की परछाई से बचने के लिए पांच मंजिला हवेली से कूद गए।जिससे धीरजसिंह जख्मी हो गए और गांव पथैना में उपचार के दौरान दम तोड दिया।गांव पथैना के बसावट होने के बाद धीरजसिंह मृत्यु प्राप्ति वाले पहले इंसान थे।जो आज गांव के भूमिया बाबा के रूप में पूज्यनीय है। प्रतिसाल गांव में इनकी यादगार में धीरज बाबा का मेला लगता है।
सार्दुल सिंह के पुत्र .धीरज सिंह के 14 थे भाई -पथैना संस्थापक ठाकुर सादुल सिंह के 14 पुत्र थे। जिनमें धीरज सिंह बाबा भी शामिल थे। बाबा धीरजसिंह स्वयं सहित 14 भाई थे। जिनके नाम से आज भी 14 कोठिया हे। जिन कोठियों को किशनसिंह, धीरजसिंह, सुजानसिंह, मेघसिंह, देवीसिंह, रतनसिंह, पोपसिंह,अजीतसिंह, जोतसिंह, किरतसिंह, गजेन्द्रसिंह, सन्तोषसिंह,रणसिंह,भीमसिंह के नाम से जाना जाता है।






