श्वानों के चंगुल से बचाकर हरिण के बच्चे की तीन माह तक सेवा के बाद वन्यजीव संरक्षण संस्थान को किया सुपुर्द

धोरीमन्ना: (भीलवाड़ा : राजकुमार गोयल) स्वार्थ के लिए पुरी दुनिया हमेशा भागदौड़ करती रहती है लेकिन इस संसार में कुछ लोग ऐसे भी मिलेंगे जो परमार्थ के लिए निस्वार्थ कार्य करते रहते हैं ऐसा ही उदाहरण पेश किया है राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पाबूबेरा में कार्यरत स्टेट अवार्डी शिक्षक जगदीश प्रसाद ने जिन्होंने 250 किलोमीटर दूरी तय करके अपने निजी वाहन से एक हिरण के बच्चे का रेस्क्यू कर मां अमृता देवी वन्यजीव संरक्षण संस्थान कातरला को सुपुर्द किया। पूर्व सरपंच कालुखा जलाखां ने बताया कि तीन माह पूर्व करालिया बेरा गांव में श्वानों ने एक मादा हिरण और उसके बच्चे को अपने चंगुल फंसा लिया तब उनके रोने की आवाज सुन पूर्व सैनिक मेहबूब खा का पोता कासखा, रमजान खा,फतेखा आवाज देते दोङे तो श्वान उनको छोङकर भाग गए। नजदीक जाकर देखा तो मादा हिरण बहुत ज्यादा घायल थी और खून बह रहा था तो थोङी बाद उनकी मौत हो गयी ।लेकिन उसका बच्चा सकुशल था जिसे कासम खा अपने घर लेकर आ गया और बकरी का दूध पिलाने लगा फिर उन्हें डर लगने लगा कि अब हिरण के बच्चे का क्या करेंगे तब उन्होंने यह बात वहां अध्यापक रह चुके किशोरी लाल बिश्नोई को बतायी तो किशोरी लाल ने पर्यावरण प्रेमी व स्टेट अवार्डी शिक्षक जगदीश प्रसाद विश्नोई धोरीमन्ना से संपर्क कर घटना की जानकारी दी तब जगदीश विश्नोई अपना निजी वाहन लेकर 250 दूर हरिण के बच्चे का रेस्क्यू कर मां अमृता देवी वन्यजीव संरक्षण संस्थान कातरला को सुपुर्द कर एक अनुपम उदाहरण पेश किया। शिक्षक विश्नोई से बात करने पर बताया कि इन वन्यजीवों की सेवा ही मानव धर्म हैं यदि हम मानवता छोङ देंगे तो आने वाला समय हमारे लिए ही खतरनाक होगा क्योंकि प्राकृतिक संतुलन के लिए इन वन्यजीवों का होना भी जरूरी है इस कारण हर व्यक्ति को मानवता का धर्म निभाते हुए स्वार्थ से हटकर कुछ परमार्थ का काम भी करते रहना चाहिए।इसी भाव और सोच को आगे बढ़ाते हुए मेरे साथी ओमप्रकाश गोदारा के साथ स्वयं के वाहन से 250 किलोमीटर दूर जाकर हिरण के बच्चे का रेस्क्यू किया साथ ही हिरण की सेवा करने वाले बच्चे का दुपट्टा व सॉल ओढ़ाकर प्रोत्साहित किया ताकि दूसरे लोग भी प्रेरित हो सके और वन्यजीवों की सेवा व सुरक्षा में अपना सहयोग दे सकें। जब रेस्क्यू टीम के सदस्य वहां पहूंचे तो वहां उपस्थित महेंद्र खा,शिक्षक मानाराम सारण,फतेह खा,कालू खान,रमज़ान खान,मूसे खान,लतीब खान,रोशन खान,छोटू,जयपु व कासिम सभी ने आभार प्रकट करते हुए हरिण के बच्चे को सुपुर्द किया।






