मंथन की उपलब्धि - ऑटिज्म पर जीत हासिल की

नारायणपुर (भारत कुमार शर्मा) बहरोड़, मंथन फाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट को दिव्यांगता के क्षेत्र में मिली एक और सफलता। डॉ. सविता गोस्वामी ने बताया कि 6 वर्षीय तृषा जो गत दो वर्षों से मंथन रिहैबिलिटेशन सेंटर ने आ रही है। तृषा ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर या स्वालीनता से ग्रसित है। ऑटिज्म जो कि एक न्यूरोडेवेलोपमेंटल डिसऑर्डर है जिसमें बच्चे को सोचने, समझने और बात करने में परेशानी होती है। ऐसे बच्चे परिजनों व समाज के साथ संपर्क स्थापित करने में, भावनाओं को व्यक्त कर पाने में, यहां तक कि रूटीन से हटकर कुछ भी नया कर पाने में असमर्थ होते हैं जिसके कारण ये बच्चे चिड़चिड़े व तनावग्रस्त रहते हैं
ऐसी ही स्थिति में 2 साल पहले तृषा जिसे प्यार से हम हनी कहते हैं हमारे पास आई थी मंथन संस्थापक डॉ. पीयूष गोस्वामी व कर्मवीर यादव मीर द्वारा दी गई थेरेपीज तथा हनी के माता पिता वंदना एवं सुमेध तेलमोर के संयुक्त प्रयासों से यह बच्ची सोचने, समझने, पढ़ने और बोलने में सक्षम हो गई है तथा आज अपनी कहानी अपनी जुबानी सुना रही है। तृषा अब अपनी उम्र के अनुसार प्रथम कक्षा में सामान्य विद्यालय में अध्ययन भी कर रही है व हाल ही विद्यालय द्वारा जारी किए परिणाम में उसने कक्षा में द्वितीय स्थान भी प्राप्त किया है जो कि एक बड़ी उपलब्धि है।
बुधवार को तृषा ने अपना जन्मदिन मंथन स्पेशल स्कूल के बच्चों व स्टॉफ के साथ मनाया। इस अवसर पर उसके माता पिता ने तृषा में आए असाधारण सुधार के लिए मंथन फाउंडेशन एवं रिहैब सेंटर के स्टाफ का आभार व्यक्त किया। ऑटिज्म एक बौद्धिक अक्षमता नहीं है कमियों के बीच असंख्य संभावनाओं को तलाशता मंथन परिवार तृषा के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है।






