पूर्व विधायक हत्याकांड में एक्शन:खुफिया इनपुट दबाने वाला कांस्टेबल सस्पेंड,कई बड़े सवाल खड़े!
भरतपुर (वैर): कोशलेन्द्र दत्तात्रेय
पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना हत्याकांड में राजस्थान पुलिस विभाग के भीतर हड़कंप मचा हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी राजेश मीणा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वैर थाने के उस कांस्टेबल को सस्पेंड कर दिया है, जिसकी नीयत और कार्यशैली पर शुरुआत से ही गंभीर सवाल उठ रहे थे।
क्या था पूरा मामला और कांस्टेबल की संदिग्ध भूमिका?
सूत्रों के मुताबिक, हत्याकांड से ठीक पहले लीज को लेकर इलाके में तनाव की गहरी परतें जम रही थीं। इस पूरे मामले में आसूचना (Intelligence) जुटाने की जिम्मेदारी कांस्टेबल पवन कुमार के कंधों पर थी। आरोप है कि तनाव की हर सुगबुगाहट की जानकारी होने के बावजूद कांस्टेबल ने उच्च अधिकारियों को अंधेरे में रखा। इतना ही नहीं, कांस्टेबल पवन कुमार की संदिग्ध भूमिका का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह लगातार भौडागांव के लोगों के संपर्क में बना हुआ था।
मौके पर पुलिस गायब, अस्पताल पहुँचाने वाले भी दूसरे थाने के इंचार्ज!
लापरवाही की इंतहा देखिए—जिस दिन पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की निर्मम हत्या हुई, वैर थाने की पुलिस को मौके पर पहुँचने की सुधि तक नहीं थी। घायल पूर्व विधायक को अस्पताल पहुँचाने का जिम्मा खेड़ली मोड़ थाना इंचार्ज पवन यादव को उठाना पड़ा, क्योंकि कांस्टेबल पवन कुमार ने अपनी जिम्मेदारी से मुँह मोड़ते हुए अधिकारियों को घटना की समय पर भनक तक नहीं लगने दी थी।
कार्रवाई की गाज, पर क्या अभी और चेहरे बेनकाब होंगे?
पुलिस इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में अब तक 9 आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुँचा चुकी है। लेकिन खाकी के भीतर छिपे 'गद्दारों' पर भी गाज गिरनी शुरू हो गई है।
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13 अक्टूबर को वैर थानाधिकारी धीरेंद्र को निलंबित किया जा चुका है।
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भुसावर वृत के वृताधिकारी (CO) नीरज भारद्वाज और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) प्रेरणा शेखावत को पहले ही एपीओ (APO) किया जा चुका है।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर किसकी शह पर इस खूनी खेल की पटकथा को नजरअंदाज किया गया? क्या इस हत्याकांड के तार पुलिस की संलिप्तता के किसी और छोर से भी जुड़े हैं? जांच जारी है, और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने की पूरी उम्मीद है!

