भाजपा का घोषणा पत्र बना छलावा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने किसानों से किए वादों की दिलाई याद
जयपुर (राजस्थान) नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा पर किसानों के साथ वादाखिलाफी पर सवाल उठाते हुए उसे अपने ही घोषणा पत्र की याद दिलाई है।
जूली ने कहा है कि भाजपा ने किसानों से घोषणा पत्र में मूंगफली, मूंग, उड़द समेत कई दलहन और तिलहन की MSP पर खरीद व कोटा दोगुना करने की बात कही थी लेकिन दो साल बीतने के बाद भी यह सिर्फ कोरे वादे बने हुए हैं , उन्होंने कहा " यह है चुनावी घोषणा पत्र की सच्चाई ,इनके घोषणा पत्र में पेज नंबर 20 पर ये कहा था कि हम प्रदेश में चना मूंग और उड़द जैसी दालों को एमएसपी पर खरीदेंगे और लक्ष्य को भी दुगुना करेंगे ,लेकिन हकीकत यह है कि पूरे प्रदेश के अंदर इसकी खरीद न के बराबर की जा रही है ,लक्ष्य दुगुना करने की बात करने वाले अब छुप गए हैं, एमएसपी पर खरीद हो नहीं रही है। "
बीकानेर एवं जोधपुर संभाग की स्थिति का उल्लेख करते हुए नेता प्रतिपक्ष जूली ने कहा कि " विशेष रूप से बात करें बीकानेर और जोधपुर संभाग की जहां इन फसलों की अधिक से अधिक खेती की जाती है वहां किसानों को धरना प्रदर्शन करना पड़ रहा है। दो साल का समय बीत चुका है और इन दो सालों में हमेशा यह हालात पैदा हुए हैं कि न मूंगफली को खरीदा है न इस प्रकार की इन फसलों को खरीदा है। “
“ये झूठ का सौदा करते है,बार बार झूठ बोलते हैं और विशेष रूप से बजट के अंदर भी इन लोगों ने कहा था कि हम इसकी एमएसपी पर खरीद करेंगे, लेकिन आज यह लोग गायब हो गए हैं।“ जूली ने तीखा प्रहार किया
उन्होंने सरकार पर बजट के दौरान भी एमएसपी पर खरीद का कहने और फिर वादे से मुकर जाने का आरोप लगाया है।
भाजपा सरकार पर किसानों के हितों की अनदेखी का मुद्दा उठाते हुए जूली ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों से किया वादा भूलकर व्यापारियों के हित साधने में लगी है , “किसान को टोकन नहीं मिलता है लेकिन व्यापारियों से मिलीभगत कर इनके अधिकारी टोकन जारी कर देते हैं "
जूली ने अलवर के प्याज उत्पादक किसानों के आर्थिक संकट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विश्व प्रसिद्ध अलवर का प्याज आज किसानों के लिए चिंता का कारण बन गया है। उचित मूल्य न मिलने के कारण किसान अपनी लागत तक नहीं निकाल पा रहे हैं और आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि प्याज उत्पादक किसानों को भाव-अंतर सहायता दी जाए तथा निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।