बाजारों की रौनक हो रही फीकी: ग्राहकों के इंतजार में बीत रहा दिन, बढ़ते खर्च और घटती बिक्री से दुकानदारों की बढ़ी चिंता
ऑनलाइन बाजार और मंदी की दोहरी मार, छोटे व्यापारियों का कारोबार संकट में
खैरथल (हीरालाल भूरानी) कभी शहर की आर्थिक गतिविधियों की धड़कन माने जाने वाले स्थानीय बाजार आज सुस्ती की चपेट में है। खैरथल के सिंधी मार्केट, आदर्श मार्केट और मुख्य बाजारों में अब पहले जैसी चहल-पहल नजर नहीं आती। दुकानों के बाहर ग्राहकों की भीड़ की जगह अब व्यापारी खाली बैठे ग्राहकों का इंतजार करते दिखाई देते हैं। ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते चलन और आर्थिक मंदी ने छोटे एवं मध्यम व्यापारियों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है।
स्थानीय व्यापारी बताते हैं कि कुछ वर्ष पहले तक त्योहारों और विवाह सीजन में बाजारों में पैर रखने तक की जगह नहीं होती थी। अब ग्राहक पहले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कीमतों की तुलना करते हैं और भारी छूट देखकर वहीं खरीदारी कर लेते है। इसका सीधा असर स्थानीय दुकानों की बिक्री पर पड़ रहा है।
किराना व्यापारी रमेश कुमार बताते हैं कि पहले दुकान पर दिनभर ग्राहकों की आवाजाही बनी रहती थी, लेकिन अब कई बार घंटों तक कोई ग्राहक नहीं आता। वहीं कपड़ा और जनरल स्टोर संचालकों का कहना है कि ऑनलाइन कंपनियां भारी छूट, कैशबैक और आकर्षक ऑफर देकर बाजार का बड़ा हिस्सा अपने कब्जे में ले रही है, जबकि छोटे दुकानदारों के लिए इस तरह की प्रतिस्पर्धा करना संभव नहीं है। व्यापारियों की मुश्किलें केवल बिक्री तक सीमित नहीं है। दुकान किराया, बिजली बिल, कर्मचारियों का वेतन, जीएसटी और अन्य प्रशासनिक खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। आय घटने और खर्च बढ़ने के कारण कई दुकानदारों के सामने परिवार और व्यापार दोनों को संभालने की चुनौती खड़ी हो गई है।
छोटे व्यापारी होते हैं अर्थव्यवस्था की रीढ़
विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे व्यापार केवल सामान बेचने का माध्यम नहीं है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इनके माध्यम से हजारों परिवारों को रोजगार मिलता है और स्थानीय स्तर पर धन का प्रवाह बना रहता है। यदि यह वर्ग कमजोर होता गया तो इसका असर पूरे आर्थिक ढांचे पर दिखाई देगा। व्यापारी संगठनों ने सरकार से ऑनलाइन और ऑफलाइन व्यापार के लिए समान नियम लागू करने, करों में राहत देने तथा छोटे व्यापारियों को डिजिटल प्रशिक्षण और सस्ती ऋण सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
ऐसे तो जाएंगे छोटे प्रतिष्ठान बंद :
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो अनेक छोटे प्रतिष्ठान बंद होने की स्थिति में पहुंच सकते हैं। उनका मानना है कि स्थानीय बाजारों को बचाना केवल व्यापारियों का नहीं, बल्कि समाज और स्थानीय अर्थव्यवस्था के भविष्य का भी सवाल है।
ग्राहक नहीं, इंतजार ज्यादा
खैरथल के कई बाजारों में दुकानदार सुबह दुकान खोलते हैं, लेकिन शाम तक अपेक्षित बिक्री नहीं हो पाती। व्यापारियों का कहना है कि पहले दिनभर ग्राहकों की भीड़ रहती थी, जबकि अब अधिकांश समय ग्राहक आने का इंतजार करना पड़ता है। इससे आय और मनोबल दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
छोटे व्यापारियों की प्रमुख चुनौतियांः
ऑनलाइन कंपनियों की भारी छूट, आर्थिक मंदी, घटती क्रय शक्ति, बढ़ते किराए, बिजली बिल, जीएसटी और अन्य अनुपालन खर्च छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ बन गए हैं। बिक्री में गिरावट के कारण रोजगार और व्यवसाय की निरंतरता पर भी खतरा मंडराने लगा है।


