नाकोड़ा पार्श्व तीर्थ धाम पढ़ासली में संत-संवाद का आध्यात्मिक संगम
राजसमंद (पप्पूलाल कीर) नवनिर्मित नाकोड़ा पार्श्व तीर्थ धाम, पढ़ासली में आज अध्यात्म और सौहार्द का एक अनूठा संगम देखने को मिला। यहाँ जैन तेरापंथ धर्मसंघ के विद्वान संत मुनि प्रकाश कुमार जी एवं मुनि सिद्ध प्रज्ञ जी तथा तपा गच्छ के पूज्य पद्म भूषण विजय भूषण सूरीश्वर जी महाराज के बीच एक महत्वपूर्ण और आत्मीय भेंट-वार्तालाप संपन्न हुआ।
इस अवसर पर दोनों संतों ने जैन धर्म की समन्वयकारी परम्परा, साधना, अहिंसा और अध्यात्म पर गहन चर्चा की। संतों ने संदेश दिया कि आज के तनावपूर्ण वातावरण में धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रहकर जीवन में संयम, सद्भाव और मानवीय मूल्यों का संवाहक बने, यही समय की मांग है।
वार्तालाप के दौरान जैन एकता, युवा पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने, नशामुक्ति, शाकाहार तथा आध्यात्मिक चेतना के विस्तार पर विशेष मंथन हुआ। दोनों संतों ने परस्पर सौहार्द एवं सहयोग की भावना को धर्म की सच्ची साधना बताया।
22 देशों में भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार करने वाले मुनि सिद्ध प्रज्ञ जी ने इस अवसर पर 'प्रेक्षा ध्यान', 'जीवन विज्ञान' और 'योग क्षेम वर्ष' के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
भेंट के दौरान जब यह प्रसंग आया कि मुनि सिद्ध प्रज्ञ जी महाकाल की नगरी उज्जैन से हैं, तो आचार्य विजय भूषण जी ने बताया कि वे स्वयं इस वर्ष का चातुर्मास उज्जैन में ही करने जा रहे हैं। इस जानकारी से वातावरण में और अधिक आत्मीयता घुल गई।
गुणसागर जी जैन ने जानकारी दी कि मुनि संजय कुमार जी दिनांक 10 और 11 मई को भिक्षु विहार, केलवा में विराजेंगे और 12 मई को वहां से राजनगर के लिए विहार करेंगे।
इस आध्यात्मिक मिलन से उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं में विशेष उत्साह एवं प्रसन्नता देखी गई। श्रद्धालुओं ने इसे जैन समाज में समन्वय, सद्भाव और आध्यात्मिक एकता का एक प्रेरणादायी क्षण बताया।


