संगठन और अनुशासन से बड़ा कोई नहीं, जिलाध्यक्षों को मिला 'फ्री हैंड'; टिकट वितरण में रहेगी अहम भूमिका: मोहम्मद सलीम नागौरी
पुष्कर (राजस्थान) पुष्कर के तिलोरा में आयोजित कांग्रेस के प्रदेश स्तरीय सृजनात्मक प्रशिक्षण शिविर में भाग लेकर लौटे फलोदी जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद सलीम नागौरी ने शिविर की महत्वपूर्ण रणनीतियों और निर्णयों को मीडिया के साथ साझा किया है। एक दिवसीय संगठनात्मक दौरे पर फलोदी पहुंचे जिलाध्यक्ष ने बताया कि कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व ने संगठन की मजबूती के लिए कई ऐतिहासिक और कड़े फैसले लिए हैं।
उनके अनुसार, शिविर में जिलाध्यक्षों की भूमिका को बहुत महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। शीर्ष नेतृत्व ने अध्यक्षों को 'फ्री हैंड' होकर काम करने की सलाह दी है, जिससे उनके अधिकार और रुतबे में वृद्धि होगी। नागौरी ने बताया कि निचले स्तर से लेकर विधायक और सांसद के टिकट वितरण एवं चयन में जिलाध्यक्ष की राय को अहम माना जाएगा। फीडबैक पर दिया जा रहा जोर एक दिन की छुट्टी लेकर फलोदी आए जिलाध्यक्ष सलीम नागौरी ने शिविर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान संगठन को मजबूत करने के लिए बूथ/मंडल पदाधिकारी और अग्रिम संगठनों की कार्यप्रणाली पर गहन विचार-विमर्श किया गया। इसके अतिरिक्त, जिले के प्रत्याशियों और वरिष्ठ नेताओं के फीडबैक पर भी जोर दिया जा रहा है।
पार्टी के हर कार्यक्रम में सभी स्तर के नेताओं और पदाधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है। निष्क्रिय और गैरहाजिर नेताओं की नियमित रिपोर्ट मांगी जाएगी, जिसे अनुशासनहीनता माना जाएगा। राष्ट्रीय संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने निष्क्रियता और अनुशासनहीनता पर तुरंत प्रभावी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। आमजन-कार्यकर्ता का सम्मान बनाए रखने का संकल्प दोहराया उन्होंने यह भी बताया कि समर्पित पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल हमेशा सर्वोच्च स्थान पर रखने पर विशेष बल दिया गया, क्योंकि कार्यकर्ता ही पार्टी की रीढ़ होते हैं। प्रत्येक अध्यक्ष को पार्टी के कार्यकर्ता और आम जनता के सम्मान को हर हाल में बनाए रखने का संकल्प दोहराया गया। यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि कार्यकर्ताओं को कभी यह महसूस न हो कि उनका अध्यक्ष उनसे बड़ा है। संगठन और अनुशासन से बड़ा कोई नहीं एक सवाल के जवाब में सलीम नागौरी ने कहा कि शिविर में सबसे अहम बात यह देखने को मिली कि चाहे कितना ही बड़ा नेता क्यों न हो लेकिन संगठन और अनुशासन से बड़ा कोई नहीं हैं। शिविर में अनेक अनुभव और नवाचारों से जिलाध्यक्षों का मनोबल में बहुत इजाफा हुआ है। वे आने वाले समय में अपने अपने जिलों में अपना शानदार स्थान बनाएंगे।


