भामाशाहों के सहयोग से सुनकई की सामुदायिक लाइब्रेरी में लगा AC, भीषण गर्मी में बच्चों को मिली बड़ी राहत
सुनकई (धौलपुर/नाहरसिंह मीना)। ग्रामीण क्षेत्र में जनसहयोग और सामाजिक सहभागिता से शिक्षा के स्तर को सुधारने की एक अनुकरणीय मिसाल सामने आई है। धौलपुर जिले के सुनकई गांव में संचालित 'सामुदायिक लाइब्रेरी संविधान घर' में स्थानीय युवाओं, भामाशाहों और शिक्षाप्रेमी नागरिकों के सामूहिक सहयोग से एयर कंडीशनर (AC) स्थापित किया गया है। इस सराहनीय पहल से लाइब्रेरी में नियमित रूप से अध्ययन करने वाले ग्रामीण विद्यार्थियों को इस भीषण गर्मी में बड़ी राहत मिलेगी और उन्हें पढ़ाई के लिए एक बेहतर व अनुकूल वातावरण उपलब्ध हो सकेगा।
गौरतलब है कि क्षेत्र में इन दिनों तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, जिससे लाइब्रेरी में बैठकर प्रतियोगी परीक्षाओं और नियमित अकादमिक अध्ययन की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। लाइब्रेरी में AC लग जाने के बाद विद्यार्थियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए सभी सहयोगकर्ताओं का हृदय से आभार जताया है। छात्रों का कहना है कि अब वे बिना किसी बाधा के लंबे समय तक एकाग्रता के साथ अपनी तैयारी कर सकेंगे।
इस पुनीत कार्य में युवा पत्रकार नाहर सिंह मीना, संविधान मित्र रवि मीना सहित गांव के पंच-पटेलों और प्रबुद्ध जनों ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए शिक्षा के इस जनहितकारी अभियान को आगे बढ़ाने में अपना विशेष सहयोग दिया।
इस अवसर पर पत्रकार नाहर सिंह मीना ने लाइब्रेरी समन्वयक टीम, युवाओं और समस्त ग्रामवासियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा, "सामुदायिक लाइब्रेरी केवल एक भवन मात्र नहीं है, बल्कि यह हमारे गांव के बच्चों के सपनों और उनके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण का मुख्य केंद्र है। समाज के सामूहिक प्रयास और समर्पण से ही शिक्षा की यह अलख निरंतर प्रज्ज्वलित रहेगी।"
लाइब्रेरी संचालन समिति के अनुसार, यह पूरा अभियान पूर्णतः जनसहयोग और शिक्षा के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी की भावना पर आधारित है। इसे सफल बनाने के लिए स्थानीय शिक्षकों, सरकारी कर्मचारियों, व्यापारियों, किसानों, स्वरोजगार से जुड़े साथियों और युवाओं ने अपनी सामर्थ्य अनुसार आर्थिक योगदान देकर ग्रामीण शिक्षा को संबल प्रदान किया है।
ज्ञान यज्ञ को निरंतर जारी रखने की अपील: लाइब्रेरी संचालन समिति ने सभी ग्रामवासियों और शिक्षाप्रेमियों से अपील की है कि वे इस पुस्तकालय के विकास और सुविधाओं को निरंतर बनाए रखने के लिए आगे भी अपना सहयोग जारी रखें। समिति ने कहा कि "दान की महानता राशि में नहीं, बल्कि भावना में होती है।" कोई भी नागरिक प्रतिमाह ₹200 का नियमित सहयोग देकर या अपनी स्वेच्छा से ₹50, ₹100, ₹500 अथवा ₹1000 की राशि या उपयोगी पुस्तकें दान कर इस ज्ञान यज्ञ में सहभागी बन सकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के सपनों को पंख मिल सकें।


