प्लेसमेंट एजेंसियों की मनमानी पर सरकार का बड़ा एक्शन: 4 साल के खातों का होगा स्पेशल ऑडिट; संविदा कर्मियों के पीएफ, मानदेय और जीएसटी में गड़बड़ी मिलने पर ठेकेदारों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई

May 18, 2026 - 21:20
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प्लेसमेंट एजेंसियों की मनमानी पर सरकार का बड़ा एक्शन: 4 साल के खातों का होगा स्पेशल ऑडिट; संविदा कर्मियों के पीएफ, मानदेय और जीएसटी में गड़बड़ी मिलने पर ठेकेदारों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई

उदयपुर (राजस्थान) मुख्यमंत्री निशुल्क निरोगी राजस्थान योजना (दवा) के तहत सरकारी अस्पतालों और दवा काउंटरों पर कार्यरत संविदा कर्मियों के हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सेवा प्रदाता प्लेसमेंट एजेंसियों (ठेकेदारों) द्वारा संविदा कर्मियों के वित्तीय लेन-देन, मानदेय और प्रॉविडेंट फंड (पीएफ) की कटौती में सामने आ रही अनियमितताओं पर नकेल कसने के लिए सरकार ने विशेष ऑडिट (Special Audit) कराने के आदेश जारी किए हैं।

  • 4 साल के वित्तीय रिकॉर्ड की होगी सघन जांच:

 जन स्वास्थ्य निदेशक रवि प्रकाश शर्मा द्वारा जारी आदेशों के तहत, वित्तीय वर्ष 2022-23 से लेकर वर्तमान वित्तीय वर्ष तक इन प्लेसमेंट एजेंसियों द्वारा किए गए सभी वित्तीय लेन-देन का गहनता से स्पेशल ऑडिट किया जाएगा। इसके लिए संभाग स्तर पर 3 सदस्यों वाली उच्च स्तरीय कमेटियों का गठन किया गया है। यह कमेटियां आगामी 25 मई तक संविदा कर्मियों को मिलने वाले मानदेय, पीएफ (PF) कटौती, जीएसटी (GST) और सर्विस चार्ज के नियमों की बारीकी से जांच करेंगी।

  • पीएफ चोरी और शोषण की शिकायतों पर कड़ा कदम:

विगत कई समय से स्थानीय पीएफ कार्यालय और स्वास्थ्य विभाग को हर महीने ऐसी करीब 10 शिकायतें प्राप्त हो रही थीं, जिनमें आरोप लगाया गया था कि प्लेसमेंट एजेंसियां संविदा कर्मियों के वेतन से पीएफ का पैसा तो काट लेती हैं, लेकिन उसे पीएफ खाते में जमा नहीं कराती हैं। अकेले उदयपुर के आरएनटी (RNT) मेडिकल कॉलेज से जुड़े चिकित्सालयों और जिलेभर में करीब 1,000 से अधिक कर्मचारी इन एजेंसियों के माध्यम से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

  • गड़बड़ी मिलने पर होगी सीधी और दंडात्मक कार्रवाई:

 उदयपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. अशोक आदित्य ने बताया कि गठित की गई कमेटियां अपनी विस्तृत रिपोर्ट आगामी 30 मई तक मुख्यालय को प्रेषित करेंगी। ऑडिट के दौरान यदि किसी भी प्लेसमेंट एजेंसी द्वारा वित्तीय अनियमितता, पीएफ चोरी, जीएसटी हेराफेरी या संविदा कर्मियों के मानदेय में अनुचित कटौती की पुष्टि होती है, तो संबंधित एजेंसियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराने, ब्लैकलिस्ट करने और उनके बिलों को रोकने जैसी बेहद सख्त कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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