महिलाओं द्वारा पति की लंबी उम्र और सुख समृद्धि की कामना का व्रत 16 मई को
अलवर (राजस्थान/कमलेश जैन) वट सावित्री व्रत 16 मई को है, ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले सारे व्रतों में वट सावित्री व्रत को बहुत प्रभावी माना जाता है। इसमें महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वट सावित्री व्रत को राजस्थान सहित उत्तरप्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, दिल्ली और हरियाणा कई जगहों पर मनाया जाता है। मान्यता है कि जितनी उम्र बरगद के पेड़ की होती है, सुहागिनें भी बरगद के पेड़ की उम्र के बराबर अपने पति की उम्र मांगती हैं।
योग शिक्षक पंडित लोकेश कुमार ने बताया कि क्या करना चाहिए इस दिन 16 मई के दिन जल से वटवृक्ष को सींचकर उसके तने के चारों ओर कच्चा धागा लपेटकर तीन बार परिक्रमा करें। वट सावित्री के दिन महिलाएं व्रत रखकर वट वृक्ष के पास जाकर धूप, दीप नैवेद्य आदि से पूजा करें। रोली और अक्षत चढ़ाकर वट वृक्ष पर कलावा बांधती हैं और हाथ जोड़कर वट वृक्ष की परिक्रमा करती हैं। वहीं अमावस्या पर स्नान, दान, पितरों की पूजा और धन प्राप्ति के खास उपाय भी किए जाते हैं। अमावस्या तिथि के दिन महिलाएं बांस की टोकरी में सप्त धान्य के ऊपर ब्रह्मा और वट सावित्री और दूसरी टोकरी में सत्यवान एवं सावित्री की प्रतिमा स्थापित करके वट के समीप जाकर पूजन करती हैं।
वट सावित्री व्रत का मुहूर्त पंचांग के मुताबिक वट सावित्री व्रत पर अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 मई को प्रातः 05.11 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 17 मई को देर रात 01.30 मिनट पर होगी। ऐसे में 16 मई 2026 को वट सावित्री का व्रत रखा जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, यह व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए होता है।


