अजब लापरवाही:2 साल पहले निकली जा चुकी थी पित्त की थैली, गोविन्दगढ़ की लैब ने उसी में ढूंढ मारी 8 MM की पथरी
गोविन्दगढ़ कस्बे में निजी डायग्नोस्टिक सेंटर्स की विश्वसनीयता पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। स्थानीय रामगढ़ रोड स्थित 'अग्रवाल सोनोग्राफी एवं लैब' की एक ऐसी लापरवाही सामने आई है, जिसे सुनकर आम जनता ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारी भी हैरान हैं। लैब ने एक ऐसे युवक की पित्त की थैली (गॉलब्लेडर) में 8 एमएम की पथरी होना बता दिया, जिसकी यह थैली दो साल पहले ही ऑपरेशन कर निकाली जा चुकी है। इस फर्जी और गलत रिपोर्ट के कारण पीड़ित युवक को न केवल मानसिक और आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ी, बल्कि गलत इलाज के खतरे का सामना भी करना पड़ा।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, डीग जिले के बावली निवासी विष्णु (25) पुत्र जय सिंह को पेट में तेज दर्द की शिकायत थी। इस पर उसने बीती 13 मई को गोविन्दगढ़ के रामगढ़ रोड स्थित अग्रवाल सोनोग्राफी एवं लैब में अपनी सोनोग्राफी करवाई। लैब संचालकों ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि विष्णु के पित्त की थैली में 8 एमएम की बड़ी पथरी है।
इस रिपोर्ट को लेकर चिंतित विष्णु जब बेहतर इलाज के लिए अलवर के नामचीन पटेल हॉस्पिटल पहुँचा, तो वहाँ के डॉक्टरों ने उसे पुनः विजय सोनोग्राफी सेंटर भेजा। जब वहाँ दोबारा जाँच हुई तो सच सामने आया, जिसने सबको चौंका दिया। नई रिपोर्ट में साफ हुआ कि युवक के शरीर में पित्त की थैली है ही नहीं, बल्कि उसे लिवर इन्फेक्शन है।
2 साल पहले ही निकल चुकी थी पित्त की थैली
पीड़ित विष्णु ने बताया कि करीब दो साल पहले ही भरतपुर के सुरेश यादव हॉस्पिटल में ऑपरेशन के जरिए उसकी पित्त की थैली को पूरी तरह से बाहर निकाल दिया गया था। ऐसे में जो अंग शरीर में मौजूद ही नहीं है, उसमें गोविन्दगढ़ की इस निजी लैब ने न सिर्फ थैली ढूंढ निकाली, बल्कि उसमें 8 एमएम की पथरी का आकार भी तय कर दिया। यह सीधे तौर पर बिना जाँच किए, पुरानी या कयासों पर आधारित रिपोर्ट थमाने का गंभीर मामला प्रतीत होता है।
पीड़ित मरीज जब अपनी सही रिपोर्ट लेकर वापस गोविन्दगढ़ स्थित अग्रवाल लैब पहुँचा और संचालकों से इस खुली लापरवाही पर जवाब मांगा, तो उन्होंने कोई जवाब नही दिया। इसके बाद न्याय और कार्रवाई की गुहार लेकर पीड़ित ने गोविन्दगढ़ उपखंड अधिकारी (SDM) और ब्लॉक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (BCMHO) को लिखित में शिकायत दर्ज कराई है।
सरकारी योजनाओं की साख और प्रसूताओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद कस्बे में हड़कंप मच गया है। सबसे गंभीर बात यह है कि इसी 'अग्रवाल सोनोग्राफी सेंटर' पर सरकार की तरफ से गर्भवती और प्रसूता महिलाओं की निःशुल्क सोनोग्राफी की जा रही है। जब यह लैब एक सामान्य युवक की जाँच में इतनी बड़ी और जानलेवा लापरवाही कर सकती है, तो यहाँ होने वाली प्रसूताओं की जाँच कितनी सटीक होगी? जच्चा-बच्चा की जान के साथ हो रहे इस खिलवाड़ ने अब सरकारी पैनल और इस सेंटर की साख को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है।
"विष्णु नाम के एक युवक ने अग्रवाल सोनोग्राफी लैब के खिलाफ गलत और फर्जी रिपोर्ट बनाने की लिखित शिकायत दी है। मामला बेहद गंभीर है, क्योंकि जिस मरीज की पित्त की थैली 2 साल पहले ही निकाली जा चुकी है, उसकी रिपोर्ट में पथरी दर्शाई गई है। इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जाँच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।"
- अमरजीत सिंह गुर्जर ,ब्लॉक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ,गोविन्दगढ़
इस मामले को लेकर लैब संचालक से सम्पर्क किया तो रिसेप्शन पर बैठे कार्मिकों ने इस सम्बंध में कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया। वही संचालक ने फोन रिसीव नही किया।


