एसओजी का बड़ा धमाका: प्राध्यापक भर्ती में फर्जीवाड़ा; आरपीएससी का यूडीसी और मुख्य आरोपी गिरफ्तार
अजमेर/जयपुर
राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) की प्राध्यापक (इतिहास) भर्ती परीक्षा-2022 में एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने खुलासा किया है कि एक अभ्यर्थी ने न केवल डमी कैंडिडेट के जरिए परीक्षा पास कर नौकरी हासिल की, बल्कि साक्ष्यों को मिटाने के लिए आरपीएससी के एक कर्मचारी के साथ मिलकर रिकॉर्ड में हेरफेर करने की कोशिश भी की। इस मामले में एसओजी ने मुख्य आरोपी राजेश कुमार मीणा और आरपीएससी के यूडीसी मानसिंह मीणा को गिरफ्तार किया है।
कंप्यूटर से छेड़छाड़ और डमी अभ्यर्थी का खेल
एडीजी (एसओजी) विशाल बंसल के अनुसार, आरोपी राजेश कुमार मीणा ने अक्टूबर 2022 में आयोजित परीक्षा में अपनी जगह उम्मेद सिंह नामक युवक को बैठाया था। शातिर आरोपी ने प्रवेश पत्र (Admit Card) में कंप्यूटर के जरिए छेड़छाड़ की और अपनी जगह उम्मेद सिंह की फोटो लगा दी। 17 और 18 अक्टूबर 2022 को हुई परीक्षा के दौरान उपस्थिति पत्रक (Attendance Sheet) पर भी उम्मेद सिंह ने ही राजेश के फर्जी हस्ताक्षर किए। इस फर्जीवाड़े के दम पर राजेश का चयन हो गया और वह प्राध्यापक पद पर नियुक्त भी हो गया।
सबूत मिटाने के लिए आरपीएससी में लगाई 'सेंध'
नौकरी लगने के बाद राजेश को डर था कि रिकॉर्ड में मौजूद डमी अभ्यर्थी की फोटो कभी भी उसकी पोल खोल सकती है। इसे बदलवाने के लिए उसने आरपीएससी अजमेर में कार्यरत यूडीसी मानसिंह मीणा से संपर्क किया।
-
सौदा: रिकॉर्ड से फोटो बदलने के बदले 8 लाख रुपये की डील हुई।
-
लेनदेन: आरोपी यूडीसी ने 2 लाख रुपये एडवांस के तौर पर ले लिए थे।
एसओजी की कार्रवाई और गिरफ्तारी
एसओजी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अभियोग संख्या 11/2025 दर्ज किया था। मामले में डमी अभ्यर्थी उम्मेद सिंह और सहयोगी रमेश विश्नोई उर्फ ढाका पहले ही पकड़े जा चुके हैं। मुख्य आरोपी राजेश मीणा जो लंबे समय से फरार था, उसे गिरफ्तार कर 18 मई तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है। वहीं, भ्रष्टाचार और जालसाजी में संलिप्त यूडीसी मानसिंह मीणा को 12 मई को सलाखों के पीछे भेज दिया गया।
"यह एक सुनियोजित षड्यंत्र था जिसमें सरकारी कर्मचारी की मिलीभगत ने सुरक्षा घेरे को तोड़ा। हम मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं कि क्या इस गिरोह ने अन्य परीक्षाओं में भी इसी तरह की सेंधमारी की है।" — विशाल बंसल, एडीजी (एसओजी)


