न्यायपालिका में फर्जी वकीलों पर नकेल की तैयारी: 'यूनिफाइड वेरिफिकेशन सिस्टम' की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर

May 27, 2026 - 16:55
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न्यायपालिका में फर्जी वकीलों पर नकेल की तैयारी: 'यूनिफाइड वेरिफिकेशन सिस्टम' की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर

नई दिल्ली: (कमलेश जैन) देश की अदालतों में गलत पहचान और संदिग्ध दस्तावेजों के सहारे वकालत कर रहे फर्जी वकीलों पर लगाम लगाने और अधिवक्ताओं के रिकॉर्ड में पारदर्शिता लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। हाल ही में न्यायपालिका की गंभीर टिप्पणियों और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन के उस बयान के बाद यह मामला शीर्ष अदालत पहुंचा है, जिसमें देश में लगभग 35 से 40 फीसदी वकीलों के फर्जी होने की आशंका जताई गई थी।

  • बिखरे रिकॉर्ड्स और संदिग्ध डिग्रियां बनीं चुनौती

याचिका में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है कि वर्तमान में विभिन्न राज्यों की बार काउंसिल्स के रिकॉर्ड्स बिखरे हुए हैं। देश स्तर पर कोई केंद्रीय डिजिटल ढांचा न होने के कारण ऐसे लोग भी अदालतों में पेश हो जाते हैं जिनकी शैक्षणिक योग्यता, नामांकन (Enrollment) या प्रैक्टिस लाइसेंस संदिग्ध होते हैं। यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है, बल्कि न्याय प्रणाली पर आम जनता के भरोसे को भी कमजोर करती है।

  • क्या है 'यूनिफाइड वेरिफिकेशन सिस्टम' की मांग?

इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए याचिका में अदालत से मांग की गई है कि वह बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को एक 'यूनिफाइड वेरिफिकेशन सिस्टम' (एकीकृत सत्यापन प्रणाली) तैयार करने का निर्देश दे। यह प्रणाली एक राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगी, जिसमें:

  • देश भर के सभी प्रमाणित अधिवक्ताओं का एक केंद्रीकृत (Centralized) डेटाबेस होगा।

  • इसमें वकीलों का नाम, बार काउंसिल एनरोलमेंट नंबर, शैक्षणिक योग्यता और उनके प्रैक्टिस स्टेटस का पूरा ब्यौरा दर्ज होगा।

  • इसके जरिए कोई भी अदालत, मुवक्किल या सरकारी एजेंसी किसी भी वकील की पहचान को डिजिटल रूप से तुरंत सत्यापित (Verify) कर सकेगी।

न्यायिक व्यवस्था में बढ़ेगी पारदर्शिता

यदि सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और राज्य बार काउंसिल्स को दिशा-निर्देश जारी करता है, तो यह देश की कानूनी व्यवस्था में एक बड़े डिजिटल सुधार की शुरुआत होगी। इस प्रणाली के लागू होने से न केवल फर्जी वकीलों की पहचान कर उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जा सकेगा, बल्कि अदालतों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही भी मजबूत होगी।

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