साहित्य जगत में नया कीर्तिमान: डॉ. विनोद दीक्षित ने संत मावजी महाराज पर लिखा 3973 शब्दों का सबसे लंबा पत्र, 8वीं बार लिम्का बुक में दर्ज
डूंगरपुर/अहमदाबाद। वागड़ की माटी के सपूत और वर्तमान में अहमदाबाद निवासी वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार व कार्टूनिस्ट डॉ. विनोद चंद्रशेखर दीक्षित ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। डॉ. दीक्षित का नाम आठवीं बार 'लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स-2026' में दर्ज किया गया है। उन्होंने यह उपलब्धि अपना ही पुराना रिकॉर्ड तोड़ते हुए हासिल की है।
संत मावजी की भविष्यवाणियों पर लिखा पत्र डॉ. दीक्षित ने इस बार “संत मावजी महाराज – भगवान कृष्ण का अवतार” विषय पर अब तक का सबसे लंबा पत्र लिखा है। कुल 3973 शब्दों के इस विस्तृत पत्र में उन्होंने संत मावजी महाराज की भविष्यवाणियों और उनके धार्मिक व सामाजिक महत्व को गहराई से रेखांकित किया है। इससे पहले उनका रिकॉर्ड 3646 शब्दों का था। उनकी इस उपलब्धि से राजस्थान और गुजरात सहित पूरे देश का गौरव बढ़ा है।
बैंक प्रबंधक से विश्व रिकॉर्ड तक का सफर बैंक ऑफ इंडिया से वरिष्ठ प्रबंधक के पद से सेवानिवृत्त डॉ. दीक्षित पिछले चार दशकों से लेखन और पत्रकारिता के क्षेत्र में एक जाना-माना नाम हैं। उन्होंने अपने लेखन सफर की शुरुआत वर्ष 1984 में सामाजिक बुराइयों के खिलाफ 'द इंडियन एक्सप्रेस' में पत्र लिखकर की थी।
अंकों में डॉ. दीक्षित की उपलब्धियां:
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लिम्का बुक रिकॉर्ड्स: 8वीं बार नाम दर्ज।
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कुल प्रकाशित पत्र: 13 हजार से अधिक।
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प्रकाशित लेख: 7 हजार से ज्यादा।
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समाचार पत्र/पत्रिकाएं: देशभर के 350 से अधिक प्रकाशनों में लेख प्रकाशित।
सम्मानों से नवाजे जा चुके हैं दीक्षित डॉ. दीक्षित को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए अब तक पत्र श्री, ब्रह्म गौरव, गुजरात गौरव और भारत गौरव रत्न जैसे अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। साहित्य और पत्रकारिता जगत के जानकारों ने डॉ. दीक्षित की इस उपलब्धि को युवा लेखकों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बताया है।