प्लास्टिक बोतलों का बहिष्कार कर तांबे के लोटों से जलसेवा,नशामुक्ति की शपथ और जूठनमुक्त भोजनशाला के संकल्प के साथ सोनङी में जागा पर्यावरण चेतना का दीप

Mar 5, 2026 - 18:16
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प्लास्टिक बोतलों का बहिष्कार कर तांबे के लोटों से जलसेवा,नशामुक्ति की शपथ और जूठनमुक्त भोजनशाला के संकल्प के साथ सोनङी में जागा पर्यावरण चेतना का दीप

भीलवाड़ा (राजकुमार गोयल) धोरीमन्ना क्षेत्र के सोनङी ग्राम में पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सुधार को समर्पित एक प्रेरक एवं अनुकरणीय अभियान का आयोजन विवाह समारोह के दौरान किया गया,जिसने पूरे क्षेत्र में सकारात्मक संदेश प्रसारित किया। 
स्टेट अवार्डी शिक्षक जगदीश प्रसाद विश्नोई ने बताया कि कोशिश पर्यावरण सेवक टीम सांचौरी-मालाणी की उपशाखा सेङवा के बैनर तले पर्यावरण सेवकों द्वारा विवाह समारोह के कार्यक्रम में प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली,नशामुक्त समाज और अन्न सम्मान जैसे महत्वपूर्ण विषयों को केंद्र में रखते हुए व्यापक जनजागरण किया करने का प्रयास किया गया।
समारोह का मुख्य आकर्षण जल स्टॉल रहा जहाँ प्लास्टिक बोतलों का पूर्ण बहिष्कार करते हुए तांबे के लोटों से पर्यावरण सेवकों द्वारा जलसेवा की गई।सेङवा टीम के प्रभारी रामप्रताप खीचङ ने बताया कि प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग पर्यावरण,जलस्रोतों और मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध हो रहा है।ऐसे में पारंपरिक धातु पात्रों विशेषकर तांबे के बर्तनों का उपयोग न केवल पर्यावरण हितैषी है बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी माना जाता है।जलसेवा के माध्यम से हम लोगों को प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर रहे हैं और दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव अपनाने का आह्वान कर रहे हैं।इस अवसर पर उपस्थित ग्रामीणों,युवाओं एवं महिलाओं को नशामुक्ति की शपथ दिलाई गई।इस दौरान जल स्टॉल से अपना संबोधन देते हुए वक्ताओं ने कहा कि नशा व्यक्ति की शारीरिक,मानसिक और आर्थिक स्थिति को कमजोर करता है तथा परिवार और समाज पर भी विपरीत प्रभाव डालता है।एक स्वस्थ और सशक्त समाज के निर्माण के लिए नशामुक्त जीवनशैली आवश्यक है।शपथ कार्यक्रम के दौरान लोगों ने दृढ़ संकल्प व्यक्त किया कि वे स्वयं नशे से दूर रहेंगे और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करेंगे।
कार्यक्रम में जूठनमुक्त भोजनशाला का संदेश भी प्रमुखता से दिया गया।इस दौरान पर्यावरण सेवकों ने पूरे दिन भोजनशाला में लोगों से अपील की कि वे भोजन उतना ही लें जितनी आवश्यकता हो और अन्न की बर्बादी से बचें।अन्नदेव का सम्मान करना हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है और बताया कि देश में जहाँ एक ओर कई लोग दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर भोजन की बर्बादी एक गंभीर सामाजिक समस्या बनती जा रही है।इस कुप्रथा को समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
पूरे कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण,जल संरक्षण,स्वच्छता,संयमित जीवनशैली और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों पर विस्तार से विचार रखे गए। विवाह समारोह में शामिल हुए हर व्यक्ति ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित होने चाहिए जिससे नई पीढ़ी में संस्कार,संवेदनशीलता और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके।इस अभियान ने सोनङी में पर्यावरण चेतना का दीप प्रज्वलित करने के साथ-साथ सामाजिक सुधार की दिशा में भी सशक्त संदेश दिया जो आने वाले समय में सकारात्मक परिवर्तन की आधारशिला सिद्ध हो सकता है।समारोह में पर्यावरण सेवक लुम्बाराम देहङू,रामप्रताप खीचङ,केसाराम बोला, बाबुलाल गोदारा व राजेश बोला कई पर्यावरण सेवकों ने निस्वार्थ भाव से पर्यावरण संरक्षण व मानव सुधार का संदेश दिया।

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