गौचर बचाओ फाउंडेशन के प्रयासों से चारागाह भूमि अतिक्रमण प्रकरण में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई

Jun 13, 2026 - 14:02
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गौचर बचाओ फाउंडेशन के प्रयासों से चारागाह भूमि अतिक्रमण प्रकरण में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई

गुरला:-(बद्रीलाल माली) ग्राम मोमी स्थित चारागाह (गौचर) भूमि पर वर्षों से हो रहे अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध गौचर बचाओ फाउंडेशन द्वारा राजस्थान संपर्क पोर्टल पर दर्ज करवाई गई शिकायत पर प्रशासन द्वारा महत्वपूर्ण कार्रवाई प्रारम्भ कर दी गई है। शिकायत संख्या 052607826946840 पर तहसील प्रशासन ने जांच कर पाया कि चारागाह भूमि पर अवैध कब्जे एवं अतिक्रमण के संबंध में मामला प्रथम दृष्टया सही पाया गया, जिसके आधार पर राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 91 के अंतर्गत प्रकरण संख्या 35/2026, 36/2026 एवं 37/2026 दर्ज कर कार्यवाही प्रारम्भ कर दी गई है 
शिकायत में बताया गया था कि ग्राम भोमी की चारागाह भूमि पर अनेक व्यक्तियों द्वारा अवैध रूप से बाड़बंदी कर खेती की जा रही है, जिससे उक्त भूमि पशुओं के चरने के उपयोग में नहीं आ रही है। चारागाह भूमि पर अतिक्रमण ग्रामीण पशुपालकों, गौवंश एवं पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए राजस्व विभाग ने धारा 91 के अंतर्गत अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध बेदखली कार्यवाही प्रारम्भ की है।
गौचर बचाओ फाउंडेशन की महत्वपूर्ण भूमिका
गौचर बचाओ फाउंडेशन पिछले कई वर्षों से राजस्थान सहित देशभर में गौचर, चारागाह, ओरान, देवस्थल एवं अन्य सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए जन-जागरण, कानूनी संघर्ष एवं प्रशासनिक स्तर पर लगातार प्रयास कर रहा है।
फाउंडेशन के राष्ट्रीय संयोजक गोटू सिंह मंगलपुरा के नेतृत्व में अनेक ग्रामों की चारागाह भूमि को बचाने के लिए शिकायतें, जनसुनवाई, राजस्व प्रकरण, जनहित याचिकाएँ एवं विभिन्न विभागों में अभियान चलाए जा रहे हैं। फाउंडेशन का मानना है कि चारागाह भूमि केवल पशुओं के लिए ही नहीं बल्कि भूजल संरक्षण, जैव विविधता, पर्यावरण संतुलन एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
गौचर बचाओ फाउंडेशन ने कहा कि यह कार्रवाई केवल प्रारंभिक कदम है। अब प्रशासन को दर्ज प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण कर वास्तविक अतिक्रमणकारियों को बेदखल करना चाहिए ताकि चारागाह भूमि पुनः ग्राम समाज एवं पशुधन के उपयोग में आ सके।
फाउंडेशन ने जिला प्रशासन एवं राजस्व अधिकारियों से मांग की है कि—

  • धारा 91 के अंतर्गत दर्ज सभी प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण किया जाए।
  • चारागाह भूमि की सीमांकन (डिमार्केशन) करवाई जाए।
  • सभी अतिक्रमणकारियों को बेदखल कर भूमि को अतिक्रमण मुक्त घोषित किया जाए।
  • भविष्य में पुनः अतिक्रमण रोकने हेतु स्थायी सीमा चिन्ह एवं सूचना पट्ट लगाए जाएं।
  • ग्राम स्तर पर चारागाह संरक्षण समितियों का गठन किया जाए।

जनसहभागिता का आह्वान
गौचर बचाओ फाउंडेशन ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि अपने क्षेत्र की चारागाह, गोचर, ओरान एवं सार्वजनिक भूमि पर होने वाले अतिक्रमणों की सूचना प्रशासन एवं फाउंडेशन को दें, ताकि सामूहिक प्रयासों से गौवंश, पर्यावरण एवं आने वाली पीढ़ियों के लिए इन अमूल्य प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके

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