ऋषभदेव अवैध धर्मांतरण मामला: राजस्थान हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी समेत 13 लोगों की खारिज की जमानत, अंतरराज्यीय सिंडिकेट के खुलासे की आशंका

Jul 26, 2026 - 07:55
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ऋषभदेव अवैध धर्मांतरण मामला: राजस्थान हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी समेत 13 लोगों की खारिज की जमानत, अंतरराज्यीय सिंडिकेट के खुलासे की आशंका

जयपुर/उदयपुर

राजस्थान उच्च न्यायालय ने उदयपुर जिले के ऋषभदेव थाना क्षेत्र में सामने आए कथित अवैध एवं जबरन धर्मांतरण के चर्चित मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए 13 आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। जस्टिस सुनील बेनीवाल की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान आरोपियों की भूमिका को प्रथमदृष्टया एक 'संगठित सिंडिकेट' के रूप में पाया है। कोर्ट ने यह भी माना कि इस मामले में जांच अभी जारी है और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए इस स्तर पर आरोपियों को राहत देना उचित नहीं है।

क्या हैं गंभीर आरोप और अंतरराज्यीय नेटवर्क के तार?

यह पूरा मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और राजस्थान गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2025 की धारा 3/5(1) के तहत दर्ज किया गया है।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस मामले के तार बेहद दूर तक जुड़े हैं:

  • छत्तीसगढ़ और उदयपुर का कनेक्शन: जांच में छत्तीसगढ़ के 'अनुग्रह ज्योति संस्थान' और उदयपुर की 'अपम एंड शलोमी वेलफेयर सोसाइटी' के बीच गहरे संबंध सामने आए हैं।

  • पंजाब के अंकुर नरुला से जुड़ाव: मुख्य आरोपी अमित हरीश के संबंध पंजाब के अंकुर नरुला से पाए गए हैं, जिससे एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क और विदेशी फंडिंग/कनेक्शन की आशंका जताई जा रही है। अंकुर नरुला को मुख्य आरोपी अमित का गुरु बताया गया है, जो कथित तौर पर विदेशी संस्थाओं और व्यक्तियों से जुड़ा हुआ है।

केस डायरी में मिले पुख्ता सबूत

जांच के दौरान पुलिस की केस डायरी में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। मुख्य आरोपी अमित हरीश ने पिछले चार वर्षों में 150 से 200 लोगों के धर्मांतरण करने का दावा किया है। इसके अलावा, केस डायरी में संदिग्ध मैसेज और पैसों के भारी लेन-देन के पुख्ता प्रमाण भी मिले हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल इसकी जांच विशेष जांच दल (SIT) द्वारा की जा रही है, जिससे आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।

आरोपियों की भूमिका का हुआ खुलासा

अदालत के समक्ष पेश किए गए तथ्यों के अनुसार, आरोपियों की भूमिकाएं इस प्रकार थीं:

  • छत्तीसगढ़ से आए कैंप संचालक: अमित कुमार, पलाश गुलहानी और आशीष मसीह (छत्तीसगढ़) भिलाई से उदयपुर विशेष कैंप आयोजित करने और धर्म परिवर्तन की गतिविधियों को बढ़ावा देने आए थे।

  • मुख्य संचालक और फंडिंग: हरीश (उदयपुर) स्थानीय संस्था का संचालन करता था और पंजाब के अंकुर नरुला के साथ धर्मांतरण व पैसों के लेन-देन का आदान-प्रदान करता था।

  • स्थानीय आरोपी और पादरी: प्रभुलाल, सोहनलाल, बाबूलाल सहित अन्य स्थानीय आरोपियों पर टेंट, ज़मीन और स्थल की व्यवस्था करने, सामग्री बांटने तथा स्थानीय आदिवासियों व ग्रामीणों को शिविर में बहला-फुसलाकर व उकसाकर धर्मांतरण के लिए लाने की मुख्य भूमिका पाई गई है, जो वर्तमान में पादरी बन चुके हैं।

हाईकोर्ट के इस सख्त फैसले के बाद आरोपियों और संबंधित संस्थाओं की मुश्किलें और अधिक बढ़ गई हैं।

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