लक्ष्मीनाथ मंदिर ट्रस्ट के खिलाफ भड़का ग्रामीणों का गुस्सा, ज्ञापन सौंपा; 15 वर्षों से जमे ट्रस्टियों पर मनमानी और लेखा-जोखा छिपाने का आरोप
भीलवाड़ा (राजकुमार गोयल) उपनगर पुर कस्बे के अति प्राचीन श्री लक्ष्मीनाथ भगवान मंदिर के प्रबंधन, जर्जर स्थिति और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री एवं तहसीलदार के नाम एक ज्ञापन सौंपकर मंदिर के जीर्णोद्धार, पिछले 15 वर्षों के आय-व्यय के लेखा-जोखा की निष्पक्ष जांच तथा वर्तमान ट्रस्ट के पुनर्गठन की पुरजोर मांग की है।
15 साल से एक ही चेहरे, नियम ताक पर
ज्ञापन में ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि पिछले 15 वर्षों से ट्रस्ट के पदाधिकारी अपने पदों पर कब्जा जमाए बैठे हैं। नियमों के मुताबिक हर छह माह में मंदिर का लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाना चाहिए, लेकिन बार-बार मांगने पर भी हिसाब नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पुर कस्बे और समाज के अन्य प्रबुद्ध लोगों को ट्रस्ट में प्रतिनिधित्व न देकर पारदर्शिता को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री के दौरे के बाद भी स्थिति 'ढाक के तीन पात'
ग्रामीणों ने बताया कि मंदिर का ऐतिहासिक भवन अत्यंत जर्जर हो चुका है, जिससे हर वक्त बड़े हादसे का अंदेशा बना रहता है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी अपने दौरे के दौरान मंदिर की दयनीय स्थिति देखकर आश्चर्य जताया था और इसके नवनिर्माण का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद प्रशासनिक सुस्ती के कारण आज तक धरातल पर कोई काम शुरू नहीं हो सका। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि जर्जर भवन से कोई बड़ा हादसा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
ज्ञापन सौंपने में उमड़ी भारी भीड़
ज्ञापन सौंपने के दौरान कस्बे के बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष उपस्थित रहे। इस दौरान प्रमुख रूप से संजय पारीक, देवीलाल तेली, भंवरलाल जाट, मंगलेश्वर राजौरा, अर्जुन (पंडित) त्रिवेदी, सुरेंद्र धाकड़ एवं रतनलाल सेन सहित कई ग्रामीण मौजूद थे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ट्रस्ट की जांच कर पारदर्शी पुनर्गठन नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

