सिरोही: ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास; 'पशु सखी' प्रशिक्षण से गांव-गांव पहुंचेगी बेहतर पशुपालन तकनीक
सिरोही / पिंडवाड़ा (राजस्थान)
पिंडवाड़ा (सिरोही)। राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) के तत्वावधान में पिंडवाड़ा तहसील के झाड़ोली स्थित सीएमटीसी (CMTC) सेंटर में चार दिवसीय 'पशु सखी रिफ्रेशर प्रशिक्षण' का शुभारंभ हुआ। प्रशिक्षण के पहले दिन क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आई 30 पशु सखियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पशु सखियों के व्यावहारिक ज्ञान और कौशल को निखारना है, ताकि वे ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और सही मार्गदर्शन पहुंचा सकें।
उन्नत नस्ल और संतुलित आहार पर जोर
प्रशिक्षण सत्र के दौरान एएसआरपी (ASRP) सुनील प्रजापति ने पशुपालन को फायदे का सौदा बनाने से जुड़े कई अहम विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने पशुओं की उन्नत नस्लों के चयन, नस्ल सुधार की तकनीकों, पशुओं के लिए संतुलित एवं पोषक आहार के महत्व और आधुनिक पशुपालन पद्धतियों के बारे में बारीकी से समझाया, ताकि पशुपालक कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल कर सकें।
बीमारी रोकथाम और दूध उत्पादन बढ़ाने के दिए टिप्स
प्रशिक्षण में पशुओं के स्वास्थ्य प्रबंधन, मौसम से होने वाली सामान्य बीमारियों की रोकथाम, स्वच्छ एवं सुरक्षित पशुपालन और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के प्रभावी उपायों पर विशेष रूप से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को इन सभी विषयों के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया जा रहा है, जिससे वे अपने-अपने गांवों में जाकर पशुपालकों को तकनीकी सलाह देकर सीधे लाभ पहुंचा सकें।
महिला सशक्तिकरण की ओर बढ़ते कदम
राजीविका का यह प्रशिक्षण ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। प्रशिक्षण के बाद ये 'पशु सखियां' गांवों में जाकर पशुपालकों के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगी।
कार्यक्रम के दौरान आरपीआरपी (RPRP) मणिलाल और प्रवीण रोत भी उपस्थित रहे और उन्होंने पशु सखियों का मार्गदर्शन किया।

