आरटीई भुगतान में देरी पर भड़के निजी स्कूल संचालक, अजमेर में 150 स्कूल बंद, कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन; मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
अजमेर (राजस्थान) शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत प्रवेशित बच्चों की बकाया फीस का भुगतान न होने से नाराज निजी स्कूल संचालकों का गुस्सा बुधवार को फूट पड़ा। 'राजस्थान निजी शिक्षण संस्था संघर्ष समिति, अजमेर' के बैनर तले शहर के करीब 150 निजी स्कूलों में शिक्षण कार्य पूरी तरह बंद रहा। स्कूलों में ताले लटके रहने से हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हुई। इसके बाद बड़ी संख्या में जुटे स्कूल संचालकों और प्रतिनिधियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
समिति के संरक्षक मोहनलाल कौशिक ने सरकार पर निजी शिक्षण संस्थानों की लगातार उपेक्षा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "आरटीई के तहत निजी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों की फीस का भुगतान सालों से अटका हुआ है। इससे स्कूलों पर भारी आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और रोजमर्रा का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है।"
नियमों की अनदेखी का आरोप
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नियमानुसार आरटीई की राशि हर साल तीन किस्तों में जारी होनी चाहिए। इसके बावजूद प्री-प्राइमरी (PP-3, PP-4, PP-5) और कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों का सत्र 2025-26 का भुगतान अब तक अटका हुआ है। बार-बार ध्यान आकर्षित करने के बाद भी शिक्षा विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
प्रमुख मांगें जिन पर अड़े संचालक:
- बकाया भुगतान: आरटीई की रुकी हुई राशि को तुरंत सिंगल इंस्टॉमेंट में जारी किया जाए।
- यूनिट कॉस्ट में वृद्धि: बढ़ती महंगाई के अनुपात में प्रति छात्र सरकारी सहायता राशि (यूनिट कॉस्ट) बढ़ाई जाए।
- निरीक्षण के नाम पर दखल बंद हो: प्रवेश प्रक्रिया और बोर्ड परीक्षाओं के दौरान चलाए जा रहे 'शिक्षा संबलन अभियान' और आरटीई निरीक्षणों के नाम पर होने वाली बेवजह की दखलअंदाजी रोकी जाए।
- पोर्टल की खामियां दूर हों: पीएसपी (PSP) पोर्टल की तकनीकी समस्याओं को तुरंत सुधारा जाए।
- फीस वृद्धि आदेश निरस्त हो: वर्ष 2027 से लागू होने वाले फीस वृद्धि के नए सरकारी आदेश को तुरंत वापस लिया जाए।
- उग्र आंदोलन की चेतावनी समिति के पदाधिकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही लंबित भुगतान जारी नहीं किया और तकनीकी व प्रशासनिक समस्याओं का समाधान नहीं निकाला, तो अजमेर से शुरू हुआ यह आंदोलन पूरे राजस्थान में फैलाया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


